उत्तराखंड

उत्तराखंड में बिजली की दरों में 2.68 प्रतिशत की हुई वृद्धि, विद्युत नियामक आयोग ने जारी किया नया टैरिफ

उत्तराखंड में अब उपभोक्‍ताओं को पहले के मुकाबले बिल अधिक देना होगा। राज्‍य में बिजली की दरों में 2.68 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस संबंध में गुरुवार को विद्युत नियामक आयोग ने बिजली का नया टैरिफ जारी कर दिया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए रिटेल टैरिफ के मुख्य बिन्दु
  • समस्त बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तावित संकलित वृद्धि लगभग 10.18% एवं यूपीसीएल द्वारा टैरिफ में प्रस्तावित वृद्धि लगभग 8.02% के सापेक्ष आयोग द्वारा टैरिफ में वृद्धि को प्रतिबन्धित कर मात्र लगभग 2.68% की वृद्धि की गई।
  • आयोग द्वारा विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं हेतु टैरिफ को पुनर्निधारित करते समय यह प्रयास किया गया कि सभी श्रेणियों में क्रास-सब्सिडी को कम किया जा सके।
  • बीपीएल उपभोक्ताओं (लगभग चार लाख उपभोक्ता, कुल घरेलू उपभोक्ताओं का 20 प्रतिशत) एवं स्नोबाउंड उपभोक्ताओं के टैरिफ में मात्र चार पैसा प्रति केडब्ल्‍यूएच की वृद्धि की गई।
  • घरेलू श्रेणी के 100 यूनिट प्रति माह तक उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं हेतु स्थिर प्रभार में वृद्धि नहीं की गई है। टैरिफ में मात्र 10 पैसा प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है।
  • आयोग ने क्रास सब्सिडी को धीरे-धीरे कम करने के उद्देश्य से पीटीडब्ल्यू श्रेणी के लिए विद्युत के मूल्य 208 केडब्‍यूएच से बढ़ाकर 2.15 केडब्‍यूएच किया गया है।
  • माह में प्रतिदिन 18 घंटे की न्यूनतम औसत आपूर्ति प्राप्त नहीं किए जाने की दशा में एचटी औद्योगिक उपभोक्ताओं का डिमांड चार्जेज उस माह में अनुमोदित डिमांड चार्जेज का 80 प्रतिशत लगाया जाएगा।
  • विभागीय उपभोक्ताओं के लिए घरेलू श्रेणी पर लागू टैरिफ के आधार पर समान बिलिंग होगी।
  • आयोग द्वारा पब्लिक इलैक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन के लिए निर्धारित टैरिफ रुपये रू0 5.50 केडब्‍ल्‍यूएच यथावत रखा गया है।
बिहार राष्ट्रीय

आज जारी होगा बिहार बोर्ड के 10वीं का रिजल्ट, ऐसे जान पाएंगे परिणाम

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित होने वाली मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 2022 का परिणाम आज दोपहर जारी किया जाएगा. समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि परीक्षा परिणाम बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी द्वारा जारी किया जाएगा. इस मौके पर विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार भी उपस्थित रहेंगे.

फरवरी में हुई थी परीक्षा

मैट्रिक की परीक्षा 17 फरवरी से 24 फरवरी के बीच आयोजित हुई थी. इस परीक्षा में इस साल कुल 16 लाख 48 हजार 894 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें 8,42,189 छात्र और 8,06,705 छात्राएं थीं. परीक्षा के लिए राज्य भर में 1,525 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे.

35 दिनों में जारी हो रहा रिजल्ट

समिति इस साल 35 दिनों के अंदर परीक्षा परिणाम जारी कर रही है. पिछले साल परीक्षा परिणाम 5 अप्रैल को जारी किया गया था. कोरोना के कारण 2020 और 2021 में परीक्षा परिणाम जारी करने में देरी हुई थी. इससे पहले समिति इस साल 12वीं के परीक्षा परिणाम जारी कर चुकी है.

SMS से जान पाएंगे रिजल्ट

रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट http://biharboardonline.com पर रिजल्ट चेक कर पाएंगे. रिजल्ट चेक करने के लिए छात्रों को रोल नंबर और रोल कोड की जरूरत होगी. छात्र एसएमएस (SMS) के जरिए भी रिजल्ट चेक कर पाएंगे. इसके लिए BIHAR 10 रोल- नंबर टाइप कर 56263 पर भेजना होगा.
राष्ट्रीय

Gurjar Aandolan के मुखिया रहे कर्नल किरोड़ी बैंसला का हुआ निधन, लंबे समय से चल रहे थे बीमार….

गुर्जर आंदोलन (Gurjar Aandolan) के मुखिया रहे कर्नल किरोड़ी बैंसला का निधन (Kirori Singh Bainsla passes away) हो गया है. वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे. तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जयपुर स्थित आवास से मणिपाल हॉस्पिटल ले जाया गया. जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. उनके बेटे विजय बैंसला ने पिता के निधन की पुष्टि की है. बता दें कि कर्नल बैंसला लंबे समय से गुर्जरों को आरक्षण दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे थे.

कौन थे किरोड़ी सिंह बैंसला?

कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का जन्म राजस्थान के करौली जिले के मुंडिया गांव में हुआ. गुर्जर समुदाय से आने वाले किरोड़ी सिंह ने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के तौर पर की थी लेकिन पिता के फौज में होने के कारण उनका रुझान फौज की तरफ था. उन्होंने भी सेना में जाने का मन बनाया और सिपाही के रूप में देश सेवा करने लगे. बैंसला, सेना की राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए थे. सेना में रहते हुए उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में हिस्सा लिया था.

पाकिस्तान में युद्धबंदी भी रहे थे बैंसला

किरोड़ी सिंह बैंसला पाकिस्तान में युद्धबंदी भी रहे. उन्हें दो उपनामों से जाना जाता था. सीनियर्स उन्हें ‘जिब्राल्टर की चट्टान’ और बाकी साथी कमांडो उन्हें ‘इंडियन रेम्बो’ कह कर बुलाते थे. वो किरोड़ी सिंह की जांबाजी ही थी कि सेना में मामूली सिपाही के तौर पर भी तरक्की पाते हुए वह कर्नल की रैंक तक पहुंचे. बैंसला की चार संतानें हैं. एक बेटी रेवेन्यू सर्विस में है और दो बेटे सेना में हैं. वहीं एक बेटा निजी कंपनी में कार्यरत है. बैंसला की पत्नी का निधन पहली ही हो चुका था और वे अपने बेटे के साथ हिंडौन में रहते थे.

रिटायर होने के बाद शुरू किया गुर्जर आंदोलन

सेना से रिटायर होने के बाद किरोड़ी सिंह बैंसला राजस्थान लौट आए और गुर्जर समुदाय के लिए अपनी लड़ाई शुरू की. आंदोलन के दौरान कई बार उन्होंने रेल रोकी, पटरियों पर धरना दिया. आंदोलन को लेकर उन पर कई आरोप भी लगे. किरोड़ी सिंह का कहना था कि राजस्थान के ही मीणा समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया है जिससे उन्हें सरकारी नौकरी में सही प्रतिनिधित्व मिला. लेकिन गुर्जरों के साथ ऐसा नहीं हुआ. गुर्जरों को भी उनका हक मिलना चाहिए.
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जहरीली शराब से मौत पर अफसर होंगे जिम्मेदार: नितिन अग्रवाल

नितिन अग्रवाल मंत्री बनने के बाद बुधवार को पहली बार हरदोई पहुंचे। नितिन अग्रवाल के हरदोई पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने उनका जमकर स्वागत किया। कार्यकर्ताओं के स्वागत के बाद नितिन अग्रवाल ने कहा कि आबकारी विभाग से अधिक से अधिक रेवेन्यू जेनरेट कर सरकार को दिया जाएगा जिससे अधिक से अधिक विकास कार्य कराया जा सके। नितिन अग्रवाल ने दावा किया कि प्रदेश में विषाक्त अल्कोहल से अगर कोई मौत होगी तो इसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

अपने गृह जनपद पहुंचे उत्तर प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने खास बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्होंने दी है। आबकारी विभाग सरकार को एक अच्छा रेवेन्यू भी देता है, जैसा कि आपको पता है कि मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की इकोनमी बनाने का संकल्प लिया है और उसी कड़ी में सरकार आगे काम कर रही है तो हमारे विभाग की बड़ी जिम्मेदारी भी बनती है। हमारा लक्ष्य है कि विभाग से ज्यादा से ज्यादा रेवेन्यू जनरेट करके गवर्नमेंट को दें जिससे पैसा ज्यादा आने से डेवलपमेंट के काम भी और बढ़ेंगे और डेवलपमेंट होगा तो प्रदेश की इकोनमी बढ़ेगी यही मेरा टारगेट है और इसी टारगेट को लेकर विभाग में काम की शुरुआत करूंगा।

उन्होंने कहा कि एनफोर्समेंट को और मजबूत करना और विभाग की जो इंफोर्समेंट विंग है उसकी जो पुलिसिंग है हम और बेहतर कैसे बना सकते हैं। मैंने आज ही विभागीय अधिकारियों को बुलाया था। कल भी मेरी बात हुई थी। आज भी मैंने बात की थी और मेरा यह पहला फोकस है कि जो जहरीली शराब से जो मौतें होती हैं उन पर रोकथाम लगाई जाए। अगर प्रदेश में किसी भी जगह पर अब ऐसा होगा तो उसकी सीधी जिम्मेदारी उस जिले के अधिकारी की होगी। मैं इंश्योर कराऊंगा कि उसके खिलाफ भी कड़ी कड़ी कार्रवाई हो। मैं बहुत सख्त हूं इस मामले में और विषाक्त शराब से मौतों की रोकथाम के लिए जो भी कदम उठा सकूंगा निश्चित ही उठाऊंगा।
ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे गांव हैं जहां कच्ची शराब बनाई और बेची जाती है हालांकि पुलिस कार्रवाई भी करती है लेकिन फिर से लोग अवैध शराब के कारोबार में लिप्त हो जाते हैं, ऐसे लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा?

नितिन अग्रवाल ने कहा कि सरकार इस पर काम भी कर रही है. मुख्यमंत्री जी ने कई ऐसे मौकों पर बोला है कि हम समाज के उन सभी वर्गों को मुख्यधारा में जोड़ेंगे और जोड़ने का काम करेंगे। उन्होंने किया भी है और उन्होंने बहुत से ऐसे समाज जिन को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिलती थी, उस वर्ग को प्रदेश सरकार ने चाहे वह आवास व पेंशन हो उन सभी से जोड़ने का काम किया है। यह विश्वास मानिए कि माननीय योगी आदित्यनाथ जी की सरकार में उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हर वर्ग को सम्मान मिला है और मिलेगा।

नितिन अग्रवाल आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार

राष्ट्रीय

जल संरक्षण नहीं किया तो आने वाली पीढ़ियां कभी माफ नहीं करेंगी: वाटरमैन राजेंद्र सिंह

पर्यावरणविद डा. राजेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक हमने नीर, नारी, नदी को नारायण के रूप में सम्मान दिया, तब तक हम पूरी तरह से सुरक्षित थे। किन्तु आज हमने पानी को उपयोग करने बजाय, हम उसका उपभोग करने लग गए हैं। यह कहना है रैमन मेग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित और वाटरमैन के नाम से विख्यात पर्यावरणविद् डा. राजेंद्र सिंह का। डा. सिंह उदयपुर के निजी जनार्दनराय नागर डीम्ड विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने आए हुए थे। इस दौरान उन्होने कहा कि हम नदियों का निरंतर दोहन करते जा रहे हैं, इसके संरक्षण की ओर ध्यान ही नहीं दिया, जिसका परिणाम है कि नदियां नालों में तब्दील होती जा रही हैं। जबकि जरूरत ‘रिवर को सीवर’ से मुक्त करने की है। भूमि की हरितिमा को बढ़ाने के लिए नदियों के साथ जल कुंडों को भी संरक्षित किए जाने की भी जरूरत है। उनके मुताबिक, नदी के पुनर्जन्म का काम महज नदी का काम नहीं, बल्कि यह लोगों के पुनर्जीवन का सवाल है। यह तब तक पूर्णाहूति में तब्दील नहीं हो सकती, तब तक कि लोगों की आंखों में पानी नहीं आ जाए। लोगों की आंखों का यही पानी कुओं और धरती के पेट को पानी से लबरेज करेगा और ये तभी संभव है, जब हम ‘साइंस विद सेंस और कामन सेंस को अपने जीवन से जोड़ेंगे। पानी का संरक्षण नहीं किया तो आने वाली पीढ़ियां कभी माफ नहीं करेंगी वाटरमैन राजेंद्र सिंह का कहना है कि हमारे पूर्वजों ने भरी-पूरी सदा नीरा नदियों का उपहार दिया। अगर हमने इन्हें सहेजने, संवारने की दिशा में काम नहीं किया तो हमारी भावी पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं कर पाएंगी। अगर हमें नदियों के पुनर्जनन की दिशा में काम करना है तो हमें हमारी सोच, प्रकृति के साथ हमारे संबंधों तथा शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन कर उस बुनियादी तालीम से जुड़ना होगा। जो न केवल हमें वैश्विक गुरु बनने के अपने उस पथ पर अग्रसित करेगी, जो हमने कहीं खो दिया है। उन्होंने कहा कि नदी के पुर्नजन्म की प्रक्रिया में प्रकृति द्वारा प्रदत्त जल को सहेजने, संवारने, पुनर्चक्रण की प्रक्रिया से जुड़ने के साथ यदि हमारे व्यवहार में परिवर्तन होने लगता है, तब हमें प्रकृति के साथ आत्मिक संबंध तथा मानवता से जुड़ने का एहसास होता है।
उत्तराखंड

सदन में सरकार की ओर से पेश पारित किया जाएगा लेखानुदान, इस दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर होगी चर्चा

विधानसभा सत्र के दूसरे दिन बुधवार को सरकार की ओर से पेश लेखानुदान पारित किया जाएगा। इसके साथ ही राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी। कांग्रेस विधायक धरने पर बैठे  बुधवार को कांग्रेसी विधानसभा सत्र के दौरान धरने पर बैठ गए। हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के विरोध में कांग्रेस विधायकों ने धरना शुरू किया। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में बुधवार की कार्य सूची तय की गई। बुधवार को प्रश्नकाल नहीं हुआ। सबसे पहले निधन के निदेश लिए गए। इस दौरान पूर्व विधायक हरबंस कपूर और गोपाल ओझा को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। बुधवार को सरकार की ओर से दो अध्यादेश भी विधेयक के रूप में पेश किए जा सकते हैं। उत्तरांचल विवि के 30 छात्र-छत्राओं ने देखी सदन की कार्यवाही विधानसभा के प्रथम सत्र के दूसरे दिन उत्तरांचल विश्वविद्यालय देहरादून से पत्रकारिता में अध्ययन कर रहे 30 छात्र-छत्राओं ने दर्शक दीर्घा में बैठकर सदन की कार्यवाही देखी। संसदीय कार्यवाही देखने के उपरांत बच्चों ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण का आभार व्यक्त करते हुए पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष बनने पर बधाई दी। सदन की कार्रवाई देखने के बाद सभी छात्र-छात्राओं में उत्साह देखने को मिला, सभी में लोकतंत्र के मंदिर को इतने पास से देखने एवं सदन के भीतर माननीय सदस्यों द्वारा विभिन्न विषयों पर की जा रही चर्चा को लेकर उत्सुकता भी पैदा हुई। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने अपने सभाकक्ष में सभी छात्र-छात्राओं से बातचीत की। वहीं ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सदन संचालन व सत्र की कार्यवाही को लेकर पूछे गए प्रश्नों का बच्चों को जवाब भी दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें भी प्रसन्‍नता है कि पत्रकारिता के क्षेत्र में देश के आने वाले भविष्य को अपने लोकतंत्र एवं सविधान को जानने की जिज्ञासा है। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने बच्चों को प्रश्नकाल, शून्य काल एवं विभिन्न नियमों के बारे में जानकारी दी। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने भी उत्साह पूर्वक विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया। कार्यमंत्रणा से कांग्रेस नदारद विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में भी कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था। बताया गया कि नेता प्रतिपक्ष का चयन न होने के कारण पार्टी ने कार्यमंत्रणा के लिए अपना कोई प्रतिनिधि भी नामित नहीं किया। यद्यपि, बैठक में कोरम पूरा था। बैठक में विधानसभा अध्यक्ष के अलावा संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, भाजपा विधायक खजानदास और बसपा विधायक दल के नेता मो. शहजाद उपस्थित थे। मुख्यमंत्री से मिले विधायक, उठाई जनसमस्याएं वहीं विधानसभा सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भाजपा विधायकों ने मुलाकात की और उनके समक्ष जनसमस्याओं को उठाया। विधायकों ने मुख्यमंत्री से गर्मियों के मद्देनजर बिजली व पानी का बिल जमा न करने वालों का कनेक्शन न काटे जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तियों से बिल एक साथ न लेकर किस्तों में लिए जाने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने मनरेगा के अंतर्गत तैनात किए गए लोकपाल का वेतन देने और कोरोना के दौरान अस्पतालों में तैनात किए गए उपनल कर्मियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें हटाने का विषय भी उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इन प्रकरणों पर मुख्य सचिव को उचित दिशा-निर्देश देंगे। भाजपा विधायक किशोर उपाध्याय ने बताया कि देर शाम अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री आनंद वद्र्धन ने संबंधित विभागों को कनेक्शन न काटे जाने के निर्देश जारी कर दिए। विधायकों ने कोरोना काल के दौरान अस्पतालों में तैनात किए गए उपनल कर्मियों को निकाले जाने का मसला भी मुख्यमंत्री के सामने उठाया। विधायकों ने कहा कि कोरोना काल में इन उपनल कर्मियों ने पूरी ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। कोरोना काल के कारण जनता के सामने अभी भी रोजगार का संकट खड़ा है। ऐसे में इन्हें निकाला जाना उचित नहीं है। इन्हें फिर से सेवायोजित करने के संबंध में विचार किया जाए। इस दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, खजान दास, सरिता आर्य व किशोर उपाध्याय मौजूद रहे।
उत्तराखंड

CM पुष्‍कर सिंह धामी ने निभाया अपना वादा, उत्तराखंड में वृद्धावस्‍था पेंशन योजना के अंतर्गत अब पति-पत्नी को भी मिल सकेगा लाभ…

मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने विधानसभा चुनाव से पहले वृद्धजनों के हित में किया अपना वादा निभाया है। इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। जिसके तहत उत्तराखंड में वृद्धावस्‍था पेंशन योजना के अंतर्गत अब पति और पत्नी दोनों को लाभ मिल सकेगा।इतना ही नहीं अब 1200 रुपये मिलने वाली पेंशन 1400 रुपये प्रतिमाह मिलेगी। शासनादेश जारी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश पर शासन ने उत्तराखंड में वृद्धावस्‍था पेंशन के अंतर्गत दिए जाने वाले लाभ को अब पात्र पति और पत्नी दोनों को देने का शासनादेश जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार विकल्प रहित संकल्प के ध्येय वाक्य पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि जो घोषणा पूर्व में की गई हैं उनका शासनादेश भी समय से किया जाए। प्राथमिकता के आधार पर वृद्धजनों के हित में निर्णय लिया मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर प्रदेश के वृद्धजनों के हित में यह निर्णय लिया और अब अप्रैल माह से प्रदेश के हज़ारों परिवार के पात्र वृद्ध दम्पतियों को इसका सीधा लाभ मिल सकेगा। बीते दिसंबर माह में धामी सरकार ने की थी घोषणा ज्ञात हो कि बीते दिसंबर माह में ही उत्तराखंड में दी जाने वाली वृद्धावस्था पेंशन की बढ़ोतरी के साथ ही पात्र परिवार में से पति-पत्नी दोनों को धामी सरकार ने पेंशन देने की घोषणा की थी, जिसके बाद दिसंबर में ही कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर मुहर लग गई। इतना ही नहीं अचार संहिता लगने से पूर्व इसकी सभी जरूरी कारवाई पूरी कर दी गई थी। अब मार्च महीने में नई सरकार के गठन होने के साथ ही इस सम्बंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है।
उत्तरप्रदेश राष्ट्रीय

बाल और नाखून छोड़कर कहीं भी हो सकती है टीबी:डॉ आभा

आयोजन
• स्टेट टीबी अधिकारी ने कहा, क्षय रोगी को दवा और हौसला दोनों दीजिए
• ‘रूबरू-एक मुलाकात अपनों की बात-अपनों के साथ’ कार्यक्रम हुआ
• स्वास्थ्य अधिकारी और टीबी चैंपियंस ने विस्तार से रखी अपनी बात

लखनऊ, क्षय रोग (टीबी यानि ट्यूबरक्लोसिस) कोई आनुवंशिक रोग नहीं बल्कि यह एक संक्रमण है। समय से इसका इलाज होने पर मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो सकता है। यह कहना है डॉ आभा वर्मा, निदेशक, राष्ट्रीय कार्यक्रम उत्तर प्रदेश का। डॉ आभा वर्मा मंगलवार को विश्व टीबी दिवस के तहत ‘रूबरू-एक मुलाकात अपनों की बात-अपनों के साथ’ आयोजन को संबोधित कर रही थी। वर्ल्ड विजन इंडिया के सहयोग से एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि टीबी बाल और नाखून को छोड़कर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। इसलिए टीबी का लक्षण दिखते ही जांच अवश्य करवाएं।

स्टेट क्षय रोग अधिकारी संतोष गुप्ता ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सोमवार को कानपुर से आए एक ईमेल का जिक्र किया। ईमेल भेजने वाले ने बहु को टीबी हो जाने के कारण संबंध खत्म करने की बात की थी। इसी आधार पर पता बदलने का निवेदन किया था। उन्होंने बताया कि कुछ लोग जानकारी के अभाव में इस तरह की हरकते कर रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। टीबी मरीज को प्यार और हौसला की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि कोविड के कारण टीबी कार्यक्रम थोड़ा प्रभावित हुआ है लेकिन कोरोना काल में निक्षय पोषण योजना के तहत हर मरीज को 500 रुपए रुपये दिए जाते रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2025 तक देश और प्रदेश को क्षय रोग मुक्त बनाने की दिशा उठाए जाने वाले कदम का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बलगम की जांच के लिए पोस्टल विभाग से हुआ करार बेहतरीन परिणाम दे रहा है। अब पहले की तुलना में बहुत कम समय शीघ्र और सटीक जांच हो पा रही है। उन्होंने बताया कि लखनऊ के सभी टीबी चैंपियंस में आधे से अधिक लोगों ई-लर्निंग कोर्स पूरा कर लिया है।

इस मौके पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ कैलाश बाबू, जिला क्षय रोग सेल की पूरी टीम और जनपद के 15 से अधिक टीबी चैंपियंस मौजूद रहे। आयोजन के दौरान प्रतिज्ञा पत्र पर सभी ने हस्ताक्षर किए और टीबी गान भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का मंच संचालन मुक्ता शर्मा, प्रोजेक्ट लीड यूनाईट टू एक्ट – वर्ल्ड विजन इंडिया ने किया। इस अवसर पर स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार), जीत, यूपीटीएसयू और पाथ के स्टेट प्रतिनिधि मौजूद रहे।

गुबारों में उड़ाये सवाल

कार्यक्रम के दौरान रोचक सवालों की पर्ची के गुब्बारे उड़ाये गए। सवाल जैसे टीबी कितने प्रकार के होता है ? टीबी कैसे फैलता है ? क्या इलाज के दौरान भी जांच करानी चाहिए ? इस दौरान विषय विशेषज्ञों ने सभी सवालों के विस्तारपूर्वक जवाब दिए। सही जवाब देने वाले टीबी चैंपियंस को उपहार भी दिए गए।

चैंपियंस ने सुनाई अपनी कहानी

टीबी चैंपियन सुनीता तिवारी, 35 वर्ष ने बताया कि वर्ष 2018 में तत्कालीन डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में टीबी की जांच कराई। इसमें उन्हें एक्सटापलमोनरी टीबी निकली। बीमारी पता चलते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से छह माह तक दवा खाई। इस बीमारी के दौरान पति और बच्चे ने पूरा समर्थन किया। हालांकि बीमारी के दौरान अन्य लोग गलतफहमी के करण बहुत दूरी बनाए हुए थे। सुनीता ने बताया कि इलाज के दौरान मकान मालिक ने कमरा खाली करवा दिया तो सास-ससुर ने टीबी को छुआछूत का रोग मानते हुए कई बार अमानवीय व्यवहार किया। सुनीता ने बताया कि अब मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। आप लोग भी नियमित दवा खाइए और प्रोटीन वाला आहार लीजिए। यह बीमारी स्वतः खत्म हो जाएगी। वहीं दूसरी टीबी चैंपियन सुनीता राजन ने बताया कि गर्दन के पास गांठ हो गई थी। कई महीने निजी अस्पतालों में इलाज करवाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिर में मैं सरकारी अस्पताल गई जहां बताया गया कि मुझे टीबी है। जांच के बाद टीबी की नियमित दवा खाई और मैं बिल्कुल ठीक हूं।

राष्ट्रीय

आज 5वें बिम्सटेक के सम्मेलन को संबोधित करेंगे PM मोदी, जाने क्या है बिम्सटेक?….

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को 5वें बिम्सटेक (बे आफ बंगाल इनिशिएटिव फार मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनोमिक कोआपरेशन) के सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इस बार के बिम्सटेक सम्मेलन को श्रीलंका आयोजित कर रहा है। पूरा कार्यक्रम वर्चुअली होगा। बिम्सटेक की तैयारियों के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक 28 मार्च को हुई थी। इसके अगले दिन यानी 29 मार्च को विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी। इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सातों सदस्य देशों (भारत, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश, भूटान, थाइलैंड व नेपाल) से आतंकवाद और हिंसक कट्टरता के खिलाफ सामूहिक नीति बनाने का आह्वान किया। आतंकवाद की चुनौतियों को नहीं कर सकते नजर अंदाज मंगलवार को हुई बैठक में एस जयशंकर ने कहा कि हम आतंकवाद और हिंसक कट्टरता की चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। इसी तरह से मादक पदार्थो के कारोबार और साइबर हमले भी बड़ी चुनौतियां हैं। हमारे बीच एक कानूनी ढांचा होना चाहिए ताकि हमारी कानूनी जांच एजेंसियों के बीच इस तरह की चुनौतियों के खिलाफ ज्यादा करीबी व प्रभावशाली संपर्क स्थापित हो सके। क्या है बिम्सटेक? बे आफ बंगाल इनिशिएटिव फार मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनोमिक कोआपरेशन बंगाल की खाड़ी से सटे हुए और पास के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है।‌ बिम्सटेक में बंगाल की खाड़ी के आसपास के सात सदस्य देश शामिल हैं। इसमें भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। इस संगठन का लक्ष्य आर्थिक विकास, देश की सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देने और साझा हितों के मुद्दों पर बातचीत स्थापित करने के लिए अन्य साथी सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श किया जाता है।
उत्तराखंड

फतेहपुर रेंज में तेंदुए ने एक और बुजुर्ग मह‍िला को बनाया अपना नि‍वाला, अब तक चार लोग हो चुके शिकार

 नैनीताल जिले में काठगोदाम से दस किलोमीटर आगे फतेहपुर रेंज के भदयूनी गांव की बुजुर्ग महिला को तेंदुए ने अपना शिकार बना लिया। महिला अपनी बहू के साथ पास के जंगल में घास लेने गई थी। बहू पेड़ पर चढ़कर नीचे पत्ते फेंक रही थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे तेंदुए ने पत्तों को इकट्ठा कर रही सास पर हमला कर दिया और घसीट ले गया। बहू ने तेंदुए की पूछ देकर शोर मचाया तो कुछ ही देर मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। सूचना पर रेंजर और ज्योलीकोट पुलिस भी पहुंच गई। डेढ सौ मीटर के दायरे में सर्च अभियान चलाकर शव को बरामद कर लिया गया है। शव को मोर्चरी लाया जा गया है।

 

फतेहपुर रेंज में बाघ और तेंदुए की दहशत बनी हुई है। कुछ ही महीनों में इस रेंज में चार लोगों का शिकार हो चुका है। मंगलवार की सुबह भदयूनी गांव निवासी धनुली देवी उम्र 60 वर्ष अपनी बहू लीला के साथ घर के पास के ही जंगल में घास लेने गई थी। बहू पेड़ पर चढकर नीचे पत्ते तोड़कर फेंक रही थी, जिन्हें धनूली देवी इकट्ठा कर रही थी।

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इसी दौरान घात लगाकर बैठे तेेंदुए ने धनुली पर हमला कर दिया और घसीट कर ले जाने लगा। बहू लीला नीचे देखा तो तेंदुए की सिर्फ पूछ दिखाई दी। उसने शोर मचाया तो मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। सूचना पर रेंजर केएल आर्य और ज्योलीकोट पुलिस भी पहुंच गई। सर्च अभियान चलाकर डेढ़ मीटर की रेंज में धनुली देवी का क्षत-विक्षत शव बरामद कर लिया गया। धनुली देवी को दो बेटे हैं, जो घर पर ही रहते हैं। घटना के बाद से स्वजनों में कोहराम मचा हुआ।

 

ग्रामीणों ने कहा, तेंदुए को मारा जाए

घटना के बाद से ग्रामीणों में खासा आक्रोश है। उनकी मांग है कि तेंदुए को पकड़ने की बजाए आदमखोर घोषित कर मारा जाए। कहा कि तेंदुए के मुह खून लग चुका है। ऐसे में गांव के बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर खतरा बढ़ गया है। वन कर्मचारियों को फिलहाल पिंजरा लगा देना चाहिए। लेकिन उसे पकड़ने की बजाए उसका शिकार होना चाहिए। वहीं वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही मुआवजने की रकम पीडि़त परिवार को दिलाई जाएगी।