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कोविड के बावजूद नहीं थमी परिवार नियोजन सेवाओं की रफ़्तार

लखनऊ । स्वास्थ्य इकाइयों पर हर माह की 21 तारीख को मनाया जाने वाला ‘खुशहाल परिवार दिवस’ कार्यक्रम अपने मकसद में पूरी तरह सफल रहा है। इसके माध्यम से परिवार नियोजन की सेवाओं को समुदाय स्तर पर पहुंचाने में स्वास्थ्य विभाग को बड़ी कामयाबी मिली है । राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा इस कार्यक्रम की शुरुआत प्रदेश में नवम्बर 2020 में उस वक्त हुई जब देश कोविड-19 की चपेट में था । कार्यक्रम को बीच में कुछ समय के लिए कोविड के चलते स्थगित भी करना पड़ा किन्तु स्वास्थ्य विभाग की फ्रंटलाइन वर्कर की फ़ौज (आशा, आंगनबाड़ी और एएनएम) आमजन तक परिवार नियोजन के साधनों को पहुंचाने और इस बारे में जागरूक करने में अहम् भूमिका निभायी । यही कारण रहा कि तमाम दिक्कतों के बाद भी कार्यक्रम के मकसद पर ब्रेक नहीं लगने पायी और परिवार नियोजन के सभी साधनों की मांग में वृद्धि दर्ज की गयी है ।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश के परिवार नियोजन कार्यक्रम की महाप्रबन्धक डॉ. रिंकू श्रीवास्तव का कहना है कि खुशहाल परिवार दिवस कार्यक्रम के जरिये तीन श्रेणी के दम्पति पर खास ध्यान दिया गया, जिनमें एक साल के अंदर विवाहित नवदम्पति, उच्च जोखिम गर्भावस्था में रहीं महिलाएं और दो या तीन से अधिक बच्चों वाले दम्पति शामिल रहे । वर्ष 2020-21 की बात की जाए तो इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के 1.11 लाख नवदम्पति को परिवार नियोजन की सेवाएं पहुंचाई गयीं । इसी दरम्यान करीब 1.25 लाख लक्षित दम्पति जिनमें उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली महिलाएं शामिल रहीं को भी छोटा परिवार-सुखी परिवार का मूल मन्त्र देने के साथ ही परिवार नियोजन सेवाओं से जोड़ा गया । इसके अलावा 1.63 लाख ऐसे दम्पति को सेवाएं दी गयीं जिनके तीन या उससे अधिक बच्चे थे । वर्ष 2020-21 के मुकाबले वर्ष 2021-22 में इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के 2.2 लाख नवदम्पति को परिवार नियोजन की सेवाओं से जोड़ा गया । इसी दरम्यान करीब 1.77 लाख लक्षित दम्पति जिनमें उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली महिलाएं शामिल रहीं को भी छोटे परिवार के बड़े फायदे गिनाते हुए सेवाओं से जोड़ा गया । इसके अलावा 3.39 लाख ऐसे दम्पति को सेवाएं दी गयीं जिनके तीन या उससे अधिक बच्चे थे । इस तरह वित्तीय वर्ष 2020-21 में 1.21 लाख और वित्तीय वर्ष 2021-22 में 2.99 लाख दम्पति जिनके एक या दो बच्चे हैं, उनको खुशहाल परिवार दिवस कार्यक्रम के माध्यम से परिवार नियोजन की सेवाओं से जोड़ा गया । इसमें परिवार नियोजन के बास्केट ऑफ़ च्वाइस की भी अहम् भूमिका रही, जिसके जरिये आम लोगों को अपने पसंदीदा परिवार नियोजन के साधन चुनने में आसानी हुई ।

प्रदेश में परिवार नियोजन कार्यक्रम को सही मायने में धरातल पर उतारने में जिला प्रशासन ने भी स्वास्थ्य विभाग का भरपूर साथ दिया । जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने से लेकर अमलीजामा पहनाने का बड़ा काम किया गया। इसके अलावा परिवार नियोजन से जुडी मंडल से लेकर ब्लाक स्तर तक की प्रबन्धन इकाई के साथ ही हर जिले के सीएमओ और एसीएमओ के प्रयासों का ही नतीजा रहा कि परिवार नियोजन की सेवाओं को समुदाय स्तर तक पहुंचाने में सफलता मिली । कार्यक्रम से जनप्रतिनिधियों को भी जोड़ा गया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग कार्यक्रम से जुड़ें और परिवार नियोजन की सेवाओं का लाभ उठायें।
खुशहाल परिवार दिवस के अतिरिक्त हर माह की नौ तारीख को आयोजित होने वाले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस पर भी लोगों को परिवार नियोजन की सेवाओं के बारे में जागरूक करने के साथ ही सेवाएं भी प्रदान की गयीं । यही नहीं कोविड के दौरान प्रवासी कामगारों के क्वारनटाइन का समय पूरा होने पर घर जाते समय परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों को प्रदान किया गया । इनके माध्यम से यह भी सन्देश दिया गया कि परिवार नियोजन कोई एक दिवसीय सेवा वितरण कार्यक्रम नहीं बल्कि 24 घंटे उपलब्ध होने वाली सेवा है । इन सभी प्रयासों का ही नतीजा रहा कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में भारत सरकार के स्वास्थ्य प्रबन्धन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) पोर्टल के अनुसार करीब 22.3 लाख योग्य दम्पति ने परिवार नियोजन की सेवाओं को स्वीकार करने के साथ ही उपयोग भी किया । यह उपलब्धि वित्तीय वर्ष 2019-20 के मुकाबले पांच फीसद अधिक रही । नवदम्पति को प्रदान की जाने वाली शगुन किट की भी इसमें बड़ी भूमिका रही जिसमें सौन्दर्य प्रसाधनों के अलावा परिवार नियोजन के लिए जरूरी साधनों को भी शामिल किया गया ।

क्या कहते हैं आंकड़े :
खुशहाल परिवार दिवस की वित्तीय वर्ष 2021-22 की उपलब्धियों की बात की जाए तो कोविड के बावजूद बड़ी तादाद में लाभार्थी इसके जरिये परिवार नियोजन के साधनों को अपनाने के लिए आगे आये । इस दौरान खुशहाल परिवार दिवस के माध्यम से प्रदेश में 612 को पुरुष नसबंदी और 16809 महिलाओं को नसबंदी की सेवा प्रदान की गयी । 453113 माला एन और 378850 छाया की गोलियां वितरित की गयीं। इस दौरान 86851 महिलाओं ने त्रैमासिक गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा को अपनाया । 58376 महिलाओं ने आईयूसीडी तो 30758 महिलाओं ने पीपीआईयूसीडी को अपनाया । वित्तीय वर्ष में 3473389 कंडोम का वितरण इस खास आयोजन के माध्यम से किया गया । इसके अलावा नवदम्पति के बीच 31260 शगुन किट का वितरण किया गया ।

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मौलाना कल्बे जवाद और अली ज़ैदी ने पीड़ितों के साथ किया इंसाफ

  • हुसैनी टाइगर्स की निष्पक्ष जांच से ग़रीबो के चेहरे खिले

लखनऊ संवाददाता आलम नगर स्थित वक़्फ़ सज्जादिया कॉलोनी में गरीबों के पुराने प्लाट आवंटन को रद्द कर अवैध रूप से नए आवंटियों को प्लॉट आवंटन पर उठा विवाद अब समाप्त हो गया।

पिछले कई दिनों से समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रही खबरों का संज्ञान लेते हुए मौलाना कल्बे जवाद नक्वी व शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अली जैदी ने एक जांच कमेटी बनाकर सत्यता का पता लगाने के लिये सज्जादिया कॉलोनी आलमनगर भेजा, कमेटी के सदस्य शमील शमसी व नकी हुसैन के सज्जादिया कॉलोनी पहुंचने की खबर लगते ही लोगों की भीड़ जमा होगई, पीड़ित महिलाओं और बुजुर्गों ने रो-रो कर शमील शमसी और नक़ी हुसैन को उनके साथ हुई नाइंसाफी की दास्तान बयान की शमील शमसी और नक़ी हुसैन ने उन्हें ढारस बंधाते हुए भरोसा दिलाया कि मौलाना कल्बे जवाद व चेयरमैन अली जैदी ने उन्हें यह हिदायत देकर भेजा है की किसी भी पीड़ित के साथ कोई नाइंसाफी नहीं होने दी जायेगी।

हुसैनी टाइगर्स के पदाधिकारी शमील शमसी और नक़ी हुसैन ने निरस्त किये गये प्लॉट और मकानों का मुआयना किया,
जांच कमेटी के सदस्यों को पीड़ितों ने रो-रो कर बताया कि किस तरह मोहम्मद नकवी, और हसन जाफर, ने अपने फायदे के लिए साजिश रच कर उन लोगों के प्लाट कैंसिल करके अपने ख़ास लोगों को एलॉट करवा दिये।

पीड़ितों ने जांच कमेटी को बताया कि किस तरह उनके मकानों के ताले तोड़ कर ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा लेलिया गया।
जांच कमेटी को पीड़ितों ने यह भी बताया कि वह कई बार मौलाना कल्बे जवाद से मिलने उनके आवास पर गए लेकिन उन्हें वहां मौजूद मोहम्मद नकवी व उसके लोगों के द्वारा यह कहकर वापस कर दिया जाता था की मौलाना घर पर नहीं है।

शमील शमसी और नकी हुसैन ने पीड़ितों की समस्याओं को सुनने के बाद पूरी कॉलोनी का मुआयना किया तथा अन्य लोगों से भी इस प्रकरण में जानकारी हासिल की,
जांच के बाद कमेटी ने पाया कि समाचार पत्रों में लगातार छप रही गरीबों के साथ अन्याय की खबरों और पीड़ितों द्वारा दी गई जानकारी सही है।

जाँच कमेटी के सदस्यों ने बताया कि सज्जादिया कालोनी आने से पहले मौलाना कल्बे जवाद ने उनको सख्त हिदायत देते हुए कहा कि वह लोग निष्पक्ष जांच करके मौके पर ही पीड़ितों की समस्या का समाधान करें।

जांच के बाद कमेटी के द्वारा मौके पर ही निर्णय लेते हुए कहा कि पूर्व में अलॉट किए गए प्लाटों का कोई भी आवंटन रद्द नहीं किया जाएगा, साथ ही सभी बकायेदारों से किराया जमा करने की हिदायत भी दी।

शमील शम्सी और नक़ी हुसैन के द्वारा निष्पक्ष फैसला किये जाने से ख़ुश कालोनी वासियों ने उन्हें ख़ूब दुआयें दी तथा कहा कि जिस तरह उनसे इनलोगों ने हम ग़रीबो को आज खुशियां लौटाई हैं, अल्लाह इनको हमेशा खुश रखे और कामियाब करे।

कालोनी वासियों ने मौलाना कल्बे जवाद और चेयरमैन अली ज़ैदी का शुक्रिया अदा किया और उनकी सलामती के लिये दुआ की और कहा कि कि उन्हें पहले दिन से ही पता था की मौलाना कल्बे जवाद हम गरीबों के साथ कभी नाइंसाफी नहीं कर सकते उनका कहना था कि हम सबको अच्छी तरह पता था कि उनके साथ जो कुछ भी हो रहा है हमारे मौलाना को उसकी ख़बर बिल्कुल नहीं है, उनका कहना था कि मौलाना ने ही उन्हें यहां बसाया है वो क्यों हमे उजाड़ेंगे, मौलाना कल्बे जवाद ने हम गरीबों के साथ इंसाफ किया है, अल्लाह हमारे रहबर को ज़िंदा और सलामत रखे।

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पति पत्नी के बीच आपसी समझौते के बाद महिला थाने से बाहर निकलते ही आपस में भीड़े दोनों पक्षों, जमकर हुई मारपीट

हरदोई के थाना शहर कोतवाली इलाके के पंडित पुरवा निवासी राहुल वर्मा द्वारा पत्नी की विदाई को लेकर महिला थाने में प्रार्थना दिया गया था जिसके निस्तारण के लिए पाली थाना इलाके के मुडेर निवासनी ममता देवी को थाने बुलाया गया था दोनो पक्षों की बात सुन कर महिला थाना प्रभारी रामसुखारी ने दोनों पक्षों को आपसी समझौते के बाद थाने से रवाना कर दिया,महिला थाने के बाहर आते ही पत्नी ममता व ससुर ने सिकायत कर्ता पति राहुल वर्मा को पिटने लगे,महिला थाने के बाहर मारपीट होता देख मौके पर भारी भीड जमा हो गई,पति पत्नी के लम्बे ड्रामे के बाद महिला थाना प्रभारी मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों के लोगों को हिरासत में लिया

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100% के करीब पहुंचा वयस्कों का टीकाकारण

• सरकारी केंद्रों पर टीके नाम कोई भी शुल्क न लें: राज्य टीकाकरण अधिकारी
• 15-17 आयु वर्ग के 93 प्रतिशत किशोर लगवा चुके हैं टीका
• 85 प्रतिशत से अधिक पात्र वयस्क ले चुके हैं टीके की दोनों डोज

लखनऊ, अन्य राज्यों में कोविड के बढ़ते मामलों के बीच यूपी में कोविड टीकाकरण और तेज हो गया है। साथ ही राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ अजय घई ने जिला टीकाकरण अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि टीके के नाम पर किसी भी तरह के शुल्क या वसूली नहीं होने पाए।

डॉ घई ने बताया कि प्रदेश में अब तक 85 प्रतिशत से अधिक पात्र वयस्क टीके की दोनों डोज ले चुके हैं। वहीं 15-17 आयु वर्ग के लगभग 93 प्रतिशत किशोरों ने टीका कवर प्राप्त कर लिया है और 12 से 14 आयु वर्ग के बच्चों में से 25 लाख बच्चों को टीके से प्रतिरक्षित किया जा चुका है।

डॉ घई ने बताया कि प्रदेश में 18 वर्ष से अधिक उम्र के हर नागरिक को टीका लग चुका है। 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को बूस्टर डोज दिए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रदेश में निजी टीकाकरण केंद्रों पर बूस्टर डोज लगाए जा रहे हैं। सभी पात्र जन बूस्टर डोज अवश्य लगवाएं।
प्रदेश में कोरोना संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण बना हुआ है। 30 करोड़ 51 लाख से अधिक कोविड टीके की डोज लगाने और 10 करोड़ 93 लाख से अधिक सैम्पल की जांच करने वाला एकमात्र राज्य उत्तर प्रदेश है। 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 289 कोविड मरीज उपचाराधीन हैं। अन्य राज्यों के सापेक्ष अपने प्रदेश की स्थिति संतोषप्रद है।

37 नए मरीज मिले, खुलेगा एनसीडीसी केंद्र

यूपी में विगत 24 घंटों के दौरान 90 हजार 250 कोरोना टेस्ट किए गए। इसमें 37 नए कोरोना पॉजिविट पाए गए। इसी अवधि में 36 लोग उपचारित होकर कोरोना मुक्त भी हुए। नोएडा-गाजियाबाद में 25 नए केस मिले हैं, ऐसे में दिल्ली के। वहीं प्रदेश में नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज कंट्रोल (एनसीडीसी) की शाखा खुलने जा रही है। इसके लिए प्रदेश सरकार निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराएगी।

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4, से 6 अप्रैल तक 10 हज़ार से अधिक अवर अभियन्ता एवं अभियन्ता सामूहिक अवकाश पर रहेंगे ….

  • 6000 से अधिक बिजली अभियन्ताओं एवं जूनियर इन्जीनियरों ने ऊर्जा निगम प्रबन्धन को सामूहिक अवकाश के आवेदन पत्र सौंपे
  • ऊर्जा निगमों में शीर्ष प्रबन्धन स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में जूनियर इंजीनियरों एवं अभियन्ताओं का सविनय अवज्ञा आन्दोलन 13वें दिन भी जारी
  •  संघर्ष समिति ने ऊर्जा क्षेत्र में औद्योगिक अशांति के समाधान हेतु मा0 ऊर्जा मंत्री जी से प्रभावी हस्तक्षेप की अपील की

(HT) ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन के तानाशाहीपूर्ण दमनात्नक रवैये तथा शीर्ष स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में सभी ऊर्जा निगमों के अभियन्ता व अवर अभियन्ता द्वारा जारी सविनय अवज्ञा/असहयोग आन्दोलन के 13वें दिन आज आज 6000 से अधिक बिजली अभियन्ताओं व जूनियर इंजीनियरों ने 4,5 व 6 अप्रैल को सामूहिक अवकाश पर जाने के आवेदन प्रबन्धन को सौंप दिये। सामूहिक अवकाश पर जाने वाले अभियन्ताओं में मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियन्ता, सहायक अभियंता और अवर अभियंता सम्मिलित हैं। सामूहिक अवकाश के शेष 4000 आवेदन पत्र कल 02 अप्रैल को प्रबंधन को सौंप दिये जायेंगे।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने आज प्रदेश के ऊर्जा मंत्री मा0 अरविन्द कुमार शर्मा जी से प्रभावी हस्तक्षेप की अपील करते हुए निवेदन किया है कि वे अभियन्ता संघ और जूनियर इंजीनियर संगठन के पदाधिकारियों से वार्ता कर उन्हें न्याय दिलाने की कृपा करें जिससे ऊर्जा क्षेत्र में व्याप्त औद्योगिक अशान्ति का वातावरण समाप्त हो सके।

संगठनद्वय के पदाधिकारियों वी0पी0 सिंह, प्रभात सिंह, जी0बी0 पटेल, जय प्रकाश ने आज जारी बयान में बताया कि प्रबन्धन के साथ सविनय अवज्ञा आन्दोलन एवं पूर्ण असहयोग के क्रम में 6000 से अधिक बिजली अभियन्ताओं एवं जूनियर इन्जीनियरों ने ऊर्जा निगम प्रबन्धन को सामूहिक अवकाश के आवेदन पत्र सौंप दिये हैं और सामूहिक अवकाश के शेष 4000 आवेदन पत्र कल 02 अप्रैल को प्रबंधन को सौंप दिये जायेंगे। समस्याओं के निस्तारण हेतु सार्थक कार्यवाही न हुई तो सविनय अवज्ञा आन्दोलन एवं प्रबन्धन के साथ पूर्ण असहयोग के क्रम में आगामी 04, 05 एवं 06 अप्रैल 2022 को सामूहिक अवकाश हेतु बाध्य होना पड़ेगा। ऊर्जा निगमों में ईआरपी प्रणाली खरीद एवं बिजली क्रय करने में उच्च स्तर पर बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार तथा औद्योगिक अशांति के लिये प्रबन्धन पूर्ण रूप से जिम्मेदार है। इससे जहां प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप सबको बिजली हरदम बिजली के लक्ष्य को पूर्ण कर पाने में बिजली कर्मियों को काफी दिक्कतें आ रही हैं वहीं दूसरी ओर ऊर्जा निगमों में भययुक्त वातावरण एवं नकारात्मक कार्य प्रणाली स्थापित हो रही है। यह न तो प्रदेश हित में है और न ही ऊर्जा निगमों के हित में है।

पदाधिकारियों ने आगे बताया कि ऊर्जा निगमों में आवश्यक न्यूनतम मैन, मनी, मैटीरियल उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने में भी ऊर्जा निगम प्रबन्धन पूर्ण रूप से विफल रहा है एवं अपनी विफलता छुपाने के लिए व संसाधनों की मांग करने वालों व विरोध करने वालों पर दमनात्मक कार्यवाही की जा रही है।
पदाधिकारियों ने बताया कि ऊर्जा निगमों के विभिन्न सेवा संगठनों के संयुक्त संगठन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आंदोलन को सक्रिय समर्थन देते हुए ऊर्जा क्षेत्र में औद्योगिक अशांति के समाधान हेतु मा0 ऊर्जा मंत्री जी से प्रभावी हस्तक्षेप की अपील की है जिस हेतु दोनों संगठनों ने धन्यवाद ज्ञापित किया है तथा सभी संगठनों से इस संघर्ष में शामिल होने की अपील की है।

उप्र के बिजली अभियन्ताओं एवं जूनियर इंजीनियरों ने प्रदेश में ऊर्जा मंत्री मा. ए के शर्मा जी से प्रदेश की जनता को बेहतर उपभोक्ता सेवा एवं सुचारू विद्युत आपूर्ति प्रदान करने हेतु ऊर्जा निगमों में व्याप्त नकारात्मक, दण्डात्मक, उत्पीड़नात्मक कार्य प्रणाली को समाप्त कर मनोबल बढ़ाने वाली प्रोत्साहनात्मक व स्वस्थ कार्य प्रणाली प्रदान करने हेतु सार्थक हस्तक्षेप किये जाने की अपील की है।
राजधानी लखनऊ में आज मध्यांचल मुख्यालय पर हुई विरोध सभा में इं0 पल्ल्ब मुकर्जी, इं0 जी बी पटेल, इं0 प्रभात सिंह, इं0 जय प्रकाश, इं0 विजय गुप्ता, इं0 पी के सिंह, इं आलोक कुमार श्रीवास्तव, इं0 डी के प्रजापति, इं0 अरविंद झा, इं0 जगदीश कुमार, इं0 राहुल सिंह, इं0 संजीव वर्मा, इं0 मोहित कुमार, इ0ं इंद्रेश चौधरी, इं0 पंकज कुमार, इं0 कौशल किशोर वर्मा, इं0 आशीष शर्मा, इं0 अंचल मिश्रा, इं0 आर0बी0 सिंह, इं0 शिवम त्रिपाठी, इं0 एस0एन0 पटेल, इं0 नितिन जायसवाल, इं0 सन्दीप मौर्य इं0 राहुल शर्मा, इं0 के एन शुक्ला, इं0 अभिषेक दुबे, इं0 अरविन्द कुमार, इं0 चन्द्रप्रकाश, इं0 संदीप, इं0 अभिनव तिवारी, इं0 अरविन्द कुमार, इं0 अंकित, इं0 स्वप्निल सिंह, इं0 विरेश पटेल, इं0 मनोज कुमार जायसवाल, इं0 दीपक शर्मा समेत सैकड़ों की संख्या में अभियन्ता, जूनियर इंजीनियर उपस्थित रहे।

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अलाभित समूह व कमजोर वर्ग के बच्चों का कराएँ निजी स्कूलों में मुफ्त प्रवेश.

  • तीन से सात साल के बच्चों का नर्सरी, केजी व कक्षा-एक में फ्री एडमिशन
  • प्राइवेट स्कूलों में अलाभित वर्ग व दुर्बल वर्ग के लिए 25% सीट आरक्षित
  • दो अप्रैल से शुरू होगा दूसरे चरण का ऑनलाइन आवेदन

लखनऊ। शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। पैसे के अभाव में अलाभित समूह या दुर्बल वर्ग का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए, इसका खास ख्याल रखा गया है। इसी के तहत इस समूह के तीन से सात साल के बच्चों का एलकेजी/यूकेजी या कक्षा-एक में निजी स्कूलों में भी प्रवेश की सरकार ने बाकायदा व्यवस्था कर रखी है ।

इसके लिए गैर सहायतित मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की 25 फीसद सीट इस समूह के बच्चों के लिए आरक्षित रखने की व्यवस्था है। इसका नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(ग) में प्रावधान भी किया गया है । राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. शुचिता चतुर्वेदी का कहना है कि बच्चों के हितों का ख्याल रखना आयोग का प्रमुख कार्य है । इसलिए इस वर्ग के बच्चों के लिए निजी विद्यालयों में आरक्षित सीट पर मुफ्त में प्रवेश जरूर मिले । इसके लिए संस्थाएं आगे आयें और बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाएं ।

इस बारे में महानिदेशक-स्कूल शिक्षा अनामिका सिंह ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारी व सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर इस श्रेणी के बच्चों को गैर सहायतित निजी विद्यालयों में कक्षा-एक/पूर्व माध्यमिक कक्षा की कुल क्षमता की 25 फीसद की सीमा तक मुफ्त प्रवेश कराये जाने की दिशा में सार्थक प्रयास किये जाने की बात कही है । इसके साथ ही कहा गया है कि शैक्षिक सत्र 2022-23 में इस योजना का लाभ अधिक से अधिक बच्चों को दिलाते हुए गैर सहायतित मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाए। आरटीई (राइट टू एजुकेशन) ऑनलाइन पोर्टल पर गैर सहायतित मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों के रजिस्ट्रेशन कराये जाएँ । इसके अलावा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के गैर सहायतित मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों का रजिस्ट्रेशन हो और आरटीई सीटों की संख्या का अंकन किया जाए । इसके लिए निर्धारित समय सीमा के अंदर जिन विद्यालयों द्वारा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया है उनकी मैपिंग करायी जाए और बच्चों को प्रवेश कराने के बारे में जागरूकता अभियान चलाया जाए और उनका प्रवेश भी सुनिश्चित कराया जाए ।

दो अप्रैल से दूसरे चरण में करें ऑनलाइन आवेदन :
गैर सहायतित मान्यता प्राप्त विद्यालयों में इस वर्ग के बच्चों को कक्षा-एक/पूर्व माध्यमिक कक्षाओं में ऑनलाइन आवेदन एवं लाटरी के लिए तीन चरणों में प्रक्रिया को चलाया जाना था । इसके तहत पहले चरण में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही दूसरे चरण में ऑनलाइन आवेदन 2 से 23 अप्रैल तक किया जा सकता है । 25 व 26 अप्रैल तक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आवेदन पत्रों का सत्यापन कर उन्हें लॉक कर सकेंगे और 28 अप्रैल को लाटरी निकाली जाएगी । लॉटरी में चयनित बच्चों का पांच मई तक प्रवेश सुनिश्चित कराया जाएगा । इसी तरह से तीसरे चरण में 2 मई से 10 जून के बीच ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है, 11 से 13 जून तक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी इनका सत्यापन करेंगे और 15 जून को लाटरी निकाली जायेगी । इसमें चयनित बच्चों का 30 जून तक प्रवेश सुनिश्चित कराया जायेगा । इस योजना के बारे में लोगों को जागरूक करने में जुटी ‘इंडस एक्शन’ संस्था की हेल्पलाइन नम्बर – 8510010568 पर मिस कॉल देकर अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है ।

किसको मिल सकता है लाभ :
अलाभित समूह में आने वाले अभिभावक के पास अनुसूचित जाति /जनजाति अथवा पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाणपत्र होना चाहिए । इस समूह में जिन अभिभावकों के पास कैंसर/एचआईवी का चिकित्सीय प्रमाणपत्र होगा होगा, उनके बच्चे भी आएंगे । इसके अलावा जिस बच्चे के पास नि:शक्तता/ निराश्रित व थर्ड जेंडर का प्रमाणपत्र होगा, वह भी इस श्रेणी में आएंगे । दुर्बल वर्ग में वह बच्चे आएंगे जिनके अभिभावक की सालाना आय एक लाख रुपये से कम हो या वह अभिभावक जो दिव्यांगता/वृद्धावस्था/विधवा पेंशन की श्रेणी में आते हों और उस श्रेणी की बैंक पासबुक की कापी हो । इसके अलावा बीपीएल कार्ड धारक अभिभावक के बच्चे भी इस श्रेणी में आएंगे ।

घर से विद्यालय की दूरी :
वार्ड या ग्राम पंचायत के विद्यालय में उसी वार्ड या ग्राम पंचायत के इस श्रेणी के बच्चों को प्रवेश मिलेगा । वार्ड/ग्राम पंचायत में परिषदीय/मान्यता प्राप्त तथा गैर सहायतित मान्यता प्राप्त विद्यालय न होने की स्थिति में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पास क्षेत्राधिकार बढाने का अधिकार होगा । अभिभावक का वर्तमान पते का कोई प्रमाणपत्र भी होना जरूरी है ।
हेल्पलाइन नम्बर – 8510010568 पर कॉल करके (मिस कॉल) जानकारी प्राप्त की जा सकती है ।

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जहरीली शराब से मौत पर अफसर होंगे जिम्मेदार: नितिन अग्रवाल

नितिन अग्रवाल मंत्री बनने के बाद बुधवार को पहली बार हरदोई पहुंचे। नितिन अग्रवाल के हरदोई पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने उनका जमकर स्वागत किया। कार्यकर्ताओं के स्वागत के बाद नितिन अग्रवाल ने कहा कि आबकारी विभाग से अधिक से अधिक रेवेन्यू जेनरेट कर सरकार को दिया जाएगा जिससे अधिक से अधिक विकास कार्य कराया जा सके। नितिन अग्रवाल ने दावा किया कि प्रदेश में विषाक्त अल्कोहल से अगर कोई मौत होगी तो इसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

अपने गृह जनपद पहुंचे उत्तर प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने खास बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्होंने दी है। आबकारी विभाग सरकार को एक अच्छा रेवेन्यू भी देता है, जैसा कि आपको पता है कि मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की इकोनमी बनाने का संकल्प लिया है और उसी कड़ी में सरकार आगे काम कर रही है तो हमारे विभाग की बड़ी जिम्मेदारी भी बनती है। हमारा लक्ष्य है कि विभाग से ज्यादा से ज्यादा रेवेन्यू जनरेट करके गवर्नमेंट को दें जिससे पैसा ज्यादा आने से डेवलपमेंट के काम भी और बढ़ेंगे और डेवलपमेंट होगा तो प्रदेश की इकोनमी बढ़ेगी यही मेरा टारगेट है और इसी टारगेट को लेकर विभाग में काम की शुरुआत करूंगा।

उन्होंने कहा कि एनफोर्समेंट को और मजबूत करना और विभाग की जो इंफोर्समेंट विंग है उसकी जो पुलिसिंग है हम और बेहतर कैसे बना सकते हैं। मैंने आज ही विभागीय अधिकारियों को बुलाया था। कल भी मेरी बात हुई थी। आज भी मैंने बात की थी और मेरा यह पहला फोकस है कि जो जहरीली शराब से जो मौतें होती हैं उन पर रोकथाम लगाई जाए। अगर प्रदेश में किसी भी जगह पर अब ऐसा होगा तो उसकी सीधी जिम्मेदारी उस जिले के अधिकारी की होगी। मैं इंश्योर कराऊंगा कि उसके खिलाफ भी कड़ी कड़ी कार्रवाई हो। मैं बहुत सख्त हूं इस मामले में और विषाक्त शराब से मौतों की रोकथाम के लिए जो भी कदम उठा सकूंगा निश्चित ही उठाऊंगा।
ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे गांव हैं जहां कच्ची शराब बनाई और बेची जाती है हालांकि पुलिस कार्रवाई भी करती है लेकिन फिर से लोग अवैध शराब के कारोबार में लिप्त हो जाते हैं, ऐसे लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा?

नितिन अग्रवाल ने कहा कि सरकार इस पर काम भी कर रही है. मुख्यमंत्री जी ने कई ऐसे मौकों पर बोला है कि हम समाज के उन सभी वर्गों को मुख्यधारा में जोड़ेंगे और जोड़ने का काम करेंगे। उन्होंने किया भी है और उन्होंने बहुत से ऐसे समाज जिन को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिलती थी, उस वर्ग को प्रदेश सरकार ने चाहे वह आवास व पेंशन हो उन सभी से जोड़ने का काम किया है। यह विश्वास मानिए कि माननीय योगी आदित्यनाथ जी की सरकार में उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हर वर्ग को सम्मान मिला है और मिलेगा।

नितिन अग्रवाल आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार

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बाल और नाखून छोड़कर कहीं भी हो सकती है टीबी:डॉ आभा

आयोजन
• स्टेट टीबी अधिकारी ने कहा, क्षय रोगी को दवा और हौसला दोनों दीजिए
• ‘रूबरू-एक मुलाकात अपनों की बात-अपनों के साथ’ कार्यक्रम हुआ
• स्वास्थ्य अधिकारी और टीबी चैंपियंस ने विस्तार से रखी अपनी बात

लखनऊ, क्षय रोग (टीबी यानि ट्यूबरक्लोसिस) कोई आनुवंशिक रोग नहीं बल्कि यह एक संक्रमण है। समय से इसका इलाज होने पर मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो सकता है। यह कहना है डॉ आभा वर्मा, निदेशक, राष्ट्रीय कार्यक्रम उत्तर प्रदेश का। डॉ आभा वर्मा मंगलवार को विश्व टीबी दिवस के तहत ‘रूबरू-एक मुलाकात अपनों की बात-अपनों के साथ’ आयोजन को संबोधित कर रही थी। वर्ल्ड विजन इंडिया के सहयोग से एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि टीबी बाल और नाखून को छोड़कर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। इसलिए टीबी का लक्षण दिखते ही जांच अवश्य करवाएं।

स्टेट क्षय रोग अधिकारी संतोष गुप्ता ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सोमवार को कानपुर से आए एक ईमेल का जिक्र किया। ईमेल भेजने वाले ने बहु को टीबी हो जाने के कारण संबंध खत्म करने की बात की थी। इसी आधार पर पता बदलने का निवेदन किया था। उन्होंने बताया कि कुछ लोग जानकारी के अभाव में इस तरह की हरकते कर रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। टीबी मरीज को प्यार और हौसला की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि कोविड के कारण टीबी कार्यक्रम थोड़ा प्रभावित हुआ है लेकिन कोरोना काल में निक्षय पोषण योजना के तहत हर मरीज को 500 रुपए रुपये दिए जाते रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2025 तक देश और प्रदेश को क्षय रोग मुक्त बनाने की दिशा उठाए जाने वाले कदम का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बलगम की जांच के लिए पोस्टल विभाग से हुआ करार बेहतरीन परिणाम दे रहा है। अब पहले की तुलना में बहुत कम समय शीघ्र और सटीक जांच हो पा रही है। उन्होंने बताया कि लखनऊ के सभी टीबी चैंपियंस में आधे से अधिक लोगों ई-लर्निंग कोर्स पूरा कर लिया है।

इस मौके पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ कैलाश बाबू, जिला क्षय रोग सेल की पूरी टीम और जनपद के 15 से अधिक टीबी चैंपियंस मौजूद रहे। आयोजन के दौरान प्रतिज्ञा पत्र पर सभी ने हस्ताक्षर किए और टीबी गान भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का मंच संचालन मुक्ता शर्मा, प्रोजेक्ट लीड यूनाईट टू एक्ट – वर्ल्ड विजन इंडिया ने किया। इस अवसर पर स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार), जीत, यूपीटीएसयू और पाथ के स्टेट प्रतिनिधि मौजूद रहे।

गुबारों में उड़ाये सवाल

कार्यक्रम के दौरान रोचक सवालों की पर्ची के गुब्बारे उड़ाये गए। सवाल जैसे टीबी कितने प्रकार के होता है ? टीबी कैसे फैलता है ? क्या इलाज के दौरान भी जांच करानी चाहिए ? इस दौरान विषय विशेषज्ञों ने सभी सवालों के विस्तारपूर्वक जवाब दिए। सही जवाब देने वाले टीबी चैंपियंस को उपहार भी दिए गए।

चैंपियंस ने सुनाई अपनी कहानी

टीबी चैंपियन सुनीता तिवारी, 35 वर्ष ने बताया कि वर्ष 2018 में तत्कालीन डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में टीबी की जांच कराई। इसमें उन्हें एक्सटापलमोनरी टीबी निकली। बीमारी पता चलते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से छह माह तक दवा खाई। इस बीमारी के दौरान पति और बच्चे ने पूरा समर्थन किया। हालांकि बीमारी के दौरान अन्य लोग गलतफहमी के करण बहुत दूरी बनाए हुए थे। सुनीता ने बताया कि इलाज के दौरान मकान मालिक ने कमरा खाली करवा दिया तो सास-ससुर ने टीबी को छुआछूत का रोग मानते हुए कई बार अमानवीय व्यवहार किया। सुनीता ने बताया कि अब मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। आप लोग भी नियमित दवा खाइए और प्रोटीन वाला आहार लीजिए। यह बीमारी स्वतः खत्म हो जाएगी। वहीं दूसरी टीबी चैंपियन सुनीता राजन ने बताया कि गर्दन के पास गांठ हो गई थी। कई महीने निजी अस्पतालों में इलाज करवाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिर में मैं सरकारी अस्पताल गई जहां बताया गया कि मुझे टीबी है। जांच के बाद टीबी की नियमित दवा खाई और मैं बिल्कुल ठीक हूं।

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बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किए ये निर्देश, 100 नंबरों के आधार पर तैयार किया जाएगा रिपोर्ट कार्ड

उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में बच्चों की परिक्षाएं हो चुकी है. इसके अलावा लगभग आधे से ज्यादा मूल्यांकन काम भी पूरा हो चुका है. इस बीच बेसिक शिक्षा विभाग ने बच्चों के रिपोर्ट कार्ड बनाने के निर्देश जारी किए हैं. इसके मुताबिक, प्रत्येक विषय में कुल 100 अंकों के आधार पर मूल्यांकन के निर्देश दिए हैं जबकि परीक्षा 50 अंकों की कराई गई. इसके साथ ही सभी बच्चों को प्रमोट करने का भी आदेश दिया गया है.

सभी बच्चों को किया जाएगा प्रमोट

विभाग ने निर्देश जारी करते हुए परिषदीय स्कूलों के बच्चों को प्रमोट करने का आदेश दिया है. फिर चाहे उसने परीक्षा दी हो या नहीं. बता दें कि राज्य के परिषदीय स्कूलों में 22 मार्च से परीक्षाएं शुरू हुईं तो उसी दिन इन स्कूलों के करीब 80 फीसदी शिक्षकों की ड्यूटी यूपी बोर्ड की परीक्षा में लगा दी गई. इससे परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था बेपटरी हो गई. परीक्षाएं 26 मार्च को समाप्त हो गई और मूल्यांकन का आधा काम भी समाप्त हो गया.

एक साथ हुई सभी स्कूलों में परीक्षा

सरकार ने नई शिक्षा नीति के मद्देनजर स्कूलों में कई बदलाव किए हैं. इस साल बोर्ड परीक्षा की तरह ही पूरे राज्य के परिषदीय स्कूलों में परीक्षा के लिए एक डेट शीट जारी की गई. इसी के अनुसार सभी स्कूलों में परीक्षा हुईं. इसके साथ ही बच्चों का सतत मूल्यांकन किया जा रहा है. यही वजह है कि लिखित परीक्षा के अलावा मौखिक मूल्यांकन पर भी ध्यान दिया गया. बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने बताया कि 100 अंकों के आधार पर मूल्यांकन होगा और सभी छात्र प्रमोट होंगे.

31 मार्च को बांटे जाएंगे रिपोर्ट कार्ड

गौरलतब है कि यूपी के डेढ़ लाख से ज्यादा परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 31 मार्च को रिपोर्ट कार्ड बांटे जाएंगे. रिपोर्ट कार्ड में अंकों की जगह ग्रेड दिए जाएंगे. बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल की ओर से रिपोर्ट कार्ड का प्रोफार्मा जारी कर दिया गया है. रिपोर्ट कार्ड में 91 से 100 फीसदी तक अंक पाने वाले बच्चों को ‘ए-1’ ग्रेड, 81 से 90 फीसदी तक अंक प्राप्त करने वालों को ‘ए-2’, 71 से 80 फीसदी तक अंक प्राप्त करने वालों को ‘बी-1’, 61 से 70 फीसदी तक अंक प्राप्त करने वालों को ‘बी-2’, 51 से 60 फीसदी तक अंक प्राप्त करने पर ‘सी-1’ 41 से 50 फीसदी तक अंक प्राप्त करने पर ‘सी-2’ और 33 से 40 फीसदी तक अंक प्राप्त करने पर ‘डी’ ग्रेड मिलेगा.

इसके अलावा 32 फीसदी तक अंक प्राप्त करने वाले बच्चों को ‘ई-ग्रेड’ दिया जाएगा. ई-ग्रेड पाने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. सचिव ने प्रत्येक बच्चे के रिपोर्ट कार्ड के लिए दो रुपये की धनराशि स्वीकृत की है

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सपा डेमोलाइस है,उनमे खड़ा होने का साहस नहीं है,चुनाव एकतरफा होगा, हरदोई में बीजेपी नेता पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल का बड़ा बयान

हरदोई– नरेश अग्रवाल ने अखिलेश यादव पर बोला हमला कहा तुष्टीकरण की राजनीति करने वाला इस देश में कभी भी विजयी नहीं हो सकता है

भाजपा नेता नरेश अग्रवाल ने निर्विरोध चुनाव जीतने का दावा किया

साथ ही सपा मुखिया अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला उन्होंने कहा कि मुरादाबाद फाइल्स और मेरठ फाइल्स भी बनवा लें तुष्टीकरण की राजनीति करने वाला इस देश में कभी विजयी नहीं हो सकता और देश का नेता नहीं हो सकता।

भाजपा नेता पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल से सवाल किया गया कि अखिलेश यादव कह रहे हैं कि कश्मीर फाइल्स बनी है तो लखीमपुर फाइल्स भी बननी चाहिए इस पर उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि–

वह और भी जगह की फाइल्स बनवा लें मुरादाबाद फाइल्स मेरठ फाइल्स,तुष्टीकरण की राजनीति करने वाला इस देश में कभी विजयी नहीं हो सकता है और देश का नेता नहीं हो सकता है।

नरेश अग्रवाल ने सपा सांसद एसटी हसन के बयान कि कश्मीर फ़ाइल्स को बैन कर देना चाहिए यह फिल्म नफरत फैलाने वाली है?

नरेश अग्रवाल ने कहा कि अगर नीची सोच से सोचेंगे तो इस देश में उनके बयानों का कोई महत्व नहीं होगा,अगर सत्यता दिखाई गई और उस समय के प्रधानमंत्री गृहमंत्री जो उस समय के दोषी हैं उसको बताना जनता को आवश्यक है अगर बताया है तो गलती क्या है।

नरेश अग्रवाल ने जीत का दावा करते हुए कहा कि–एमएलसी चुनाव में निर्विरोध चुनाव हो जाना चाहिए क्योंकि अभी भी सपा डेमोलाइस है,उनमे खड़ा होने का साहस नहीं है,चुनाव एकतरफा होगा।