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सीएम पिनाराई विजयन से मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का वादा, बिना किसी पूर्व सूचना के नहीं खोलेंगे मुल्लापेरियार बांध

 तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन (Tamil Nadu Chief Minister M K Stalin) ने मंगलवार को अपने केरल समकक्ष पिनाराई विजयन (Kerala CM Pinarayi Vijayan) से वादा किया है कि बिना किसी पूर्व सूचना के मुल्लापेरियार बांध (Mullaperiyar Dam) को नहीं खोला जाएगा और न ही इसमें से पानी छोड़ा जाएगा। स्टालिन ने विजयन के पत्र के जवाब में यह बात कही।

 

मुल्लापेरियार बांध के बारे में चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है

स्टालिन ने कहा, ‘मुल्लापेरियार बांध के बारे में चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। बांध में पानी के प्रवाह पर सख्ती से नजर रखी जाती है। जलग्रहण क्षेत्र में प्राप्त वर्षा बेसिन की तुलना में कम है। तमिलनाडु व्यागा बांध (Vyga dam) में अतिरिक्त पानी प्रवाहित करके रूल वक्र बनाए हुए है।’

केरल के जल संसाधन मंत्री रोशी आगस्टीन (Kerala Water Resources Minister Roshi Augustine), जो इडुक्की में डेरा डाले हुए हैं और चीजों को नियंत्रित कर रहे हैं, ने एक प्रेस विज्ञप्ति में इसकी जानकारी दी।

हर तरह से सुरक्षित है मुल्लापेरियार बांध

स्टालिन ने केरल के अपने समकक्ष को बताया कि मुल्लापेरियार बांध हर तरह से सुरक्षित है। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि मुल्लापेरियार बांध सभी पहलुओं में सुरक्षित है और बांध का बाढ़ विनियमन फरवरी 2021 में केंद्रीय जल आयोग द्वारा अनुमोदित नियम वक्र और गेट संचालन कार्यक्रम के अनुसार किया जा रहा है।’

स्टालिन ने आगे कहा, ‘हमारी बांध प्रबंधन टीम मुल्लापेरियार बांध के नीचे रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय पर उठाए जाने वाले एहतियाती उपायों पर बहुत ध्यान केंद्रित कर रही है।’

केरल के सीएम ने 5 अगस्त को स्टालिन को लिखा पत्र

इससे पहले 5 अगस्त को, केरल के सीएम ने स्टालिन को पत्र लिखकर मुल्लापेरियार बांध से पानी के निर्वहन को विनियमित करने में हस्तक्षेप करने की मांग की, जहां जल स्तर 136 फीट के अनुमेय स्तर से अधिक हो गया है।

 

विजयन ने स्टालिन को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘जैसा कि आप जानते हैं, केरल राज्य में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश हो रही है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने इडुक्की सहित केरल के कई जिलों में पहले ही रेड अलर्ट जारी कर दिया है। मुल्लापेरियार बांध का जल स्तर 136 फीट के करीब है। अगर यह स्थिति बनी रही, तो बांध के जल स्तर में भारी वृद्धि होगी।’

विजयन ने स्टालिन से यह भी अनुरोध किया कि ‘कृपया संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दें कि मुल्लापेरियार बांध के जलग्रहण क्षेत्र में भारी वर्षा को ध्यान में रखते हुए बांध से बहिर्वाह / निर्वहन प्रवाह से अधिक हो।’

पनीरसेल्वम ने सरकार पर लगाया आरोप

हालांकि, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम ने सत्तारूढ़ सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘जब अन्नाद्रमुक सत्ता में थी, मुल्लापेरियार बांध को कई बार 142 फीट तक रखा गया था, लेकिन डीएमके के सत्ता में आने के बाद दो साल तक इस प्रणाली का पालन नहीं किया गया था।’

इसके बाद, ऐसी खबरें आई हैं कि तमिलनाडु सरकार ने तमिलनाडु के किसानों से परामर्श किए बिना मुल्लापेरियार बांध से केरल क्षेत्र में प्रति सेकंड 534 क्यूबिक फीट पानी छोड़ा है।

कृषि संघों ने रूल कर्व की निंदा की

तमिलनाडु के मदुरै, डिंडीगुल, रामनाथपुरम और शिवगंगा जिलों के किसान, जो मुल्लापेरियार बांध से लाभान्वित होते हैं, का दावा है कि ‘रूल कर्व’ के कारण मुल्लापेरियार बांध 142 फीट तक पानी जमा नहीं करता है। कृषि संघों ने भी इस ‘रूल कर्व’ प्रावधान की कड़ी निंदा की है। इस ‘रूल कर्व’ नियम को मुल्लापेरियार बांध से पानी छोड़ने का कारण बताया जाता है।

रूल कर्व एक माप है जो वर्ष के अलग-अलग समय में किसी जलाशय में रखे गए भंडारण या रिक्त स्थान को परिभाषित करता है।

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उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा, गृह मंत्री ने कही यह बात

भोपाल: महाराष्ट्र उद्धव सरकार गिर चुकी है। बुधवार को उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके पश्चात् भी विपक्षी दलों का हमला उनपर जारी है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि मेरा देश बदल रहा है। पहली बार ऐसा हुआ है जब हिंदुत्व के नाम पर सरकार गिरी है। इस के चलते उन्होंने शिवसेना सांसद संजय राउत पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि संजय राउत बोल रहे थे कि विधायक अगवा हो गए हैं, वह भूल गए कि अगवा नहीं भगवा हो गए हैं।

इसके साथ ही मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने हनुमान चालीसा विवाद को लेकर भी उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार का गिरना हनुमान चालीसा का प्रभाव है कि 40 दिन में 40 MLA पार्टी छोड़ गए। आगे नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “कदली, सीप, भुजंग-मुख,स्वाति एक गुन तीन। जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल दी। कांग्रेस की संगत में जो आता है वो स्पष्ट हो जाता है। उद्धव ठाकरे कांग्रेस के संपर्क ‌में आए तो उनकी पार्टी ही साफ हो गई।

आपको बता दें कि शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के ही कई विधायकों के बागी हो जाने के पश्चात् बुधवार को देर शाम महाराष्ट्र के सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। वह शिवसेना की अगुवाई वाले महाविकास अघाड़ी की सरकार में सीएम थे। हालांकि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे से कहा है कि नई व्यवस्था बनने तक वह बतौर कार्यवाहक सीएम काम करते रहें। उद्धव ठाकरे ने बुधवार को एक ऑनलाइन संबोधन के चलते इस्तीफे की घोषणा कर दी। इस के चलते उन्होंने यह भी कहा कि वह नहीं चाहते थे कि शिवसैनिकों का खून बहे।

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महाराष्ट्र में सियासी संकट के बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी हुए कोरोना संक्रमित

महाराष्ट्र में जारी सियासी संकट के बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं. राज्यपाल कोश्यारी को रिलायंस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. भगत सिंह कोश्यारी ऐसे वक्त कोरोना वायरस से संक्रमित हुए जब राज्य की ठाकरे सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

शिवसेना विधायक और मंत्री एकनाथ शिंदे के बागी होने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट में सामना करना पड़ा सकता है. बता दें कि फ्लोर टेस्ट कराने की मंजूरी राज्यपाल देता है.

राज्यपाल को लगे कि उद्धव ठाकरे की सरकार ने सदन का विश्वास खो दिया तो ऐसे में वो बहुमत साबित करने के लिए फ्लोर टेस्ट करा सकते हैं. लेकिन राज्यपाल कोश्यारी कोरोना से संक्रमित हो गए हैं, ऐसे में ये जिम्मेदारी कौन संभालेगा तो इसके लिए किसी अन्य राज्य के राज्यपाल को ये अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.

क्या होता फ्लोर टेस्ट है? 

फ्लोर टेस्ट, मुख्य रूप से यह जानने के लिए किया जाता है कि क्या वाकई में सरकार को सदन में बहुमत प्राप्त है. यह एक संवैधानिक व्यवस्था है, जिसके तहत राज्यपाल द्वारा नियुक्त किए जा चुके एक मुख्यमंत्री को, राज्य की विधानसभा के पटल पर बहुमत साबित करने के लिए कहा जाता है.

बहुमत का दावा करने वाले पार्टी/गठबंधन के नेता को विश्वास मत हासिल करना होता है और विधानसभा में उपस्थित और मतदान करने वालों के बीच अपना बहुमत साबित करना होता है. सदन में बहुमत साबित करने में विफल रहने पर मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ता है.

शिंदे कर सकते हैं फ्लोर टेस्ट कराने की मांग

सूत्रों के मुताबिक, एकनाथ शिंदे आज यानी बुधवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को एक लेटर फैक्स कर सकते हैं. इस पत्र के जरिए वे तकरीबन 40 विधायकों का महाविकास आघाडी सरकार को समर्थन ना होने का दावा पेश कर सकते हैं. इस चिट्ठी के आधार पर राज्यपाल बाद में फ्लोर टेस्ट पर फैसला लेंगे, जहां उद्धव सरकार को अपना बहुमत साबित करना पड़ सकता है.

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नेशनल हेराल्ड केस में ईडी की कार्रवाई और अग्निपथ योजना के विरोध में आज कांग्रेस ने जंतर-मंतर पर धरना किया प्रदर्शन…

नेशनल हेराल्ड केस में ईडी की कार्रवाई और अग्निपथ योजना के विरोध में आज कांग्रेस ने जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन में भाग लिया।
केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना व ईडी की राहुल गांधी से पूछताछ पर कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता जंतर मंतर पर सत्याग्रह कर रहे हैं और लगातार राजधानी से सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं।  
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 कांग्रेस को गहलोत सरकार का समर्थन कर रहे 13 निर्दलीय विधायकों में टूट की है आशंका…

राज्यसभा चुनाव में विधायकों में भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा की सेंध के डर कांग्रेस अपने और समर्थक विधायकों की तीन से दस जून तक बाड़ेबंदी करेगी। इन विधायकों को एक साथ होटल में रखा जाएगा। बाड़ेबंदी के लिए जयपुर और उदयपुर में एक-एक होटल बुक करवाए गए हैं। विधायकों को दस जून को मतदान के दिन होटल से सीधे विधानसभा लाया जाएगा। इससे पहले बुधवार से कांग्रेस के चिंतन शिविर में किए गए बड़े फैसलों को धरातल पर उतारने को लेकर दो दिवसीय शिविर की शुरुआत हुई। जयपुर के आमेर क्लार्क्स होटल में शुरू हुए इस कैंप में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ ही मंत्री,विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे हैं। बृहस्पतिवार को शिविर समाप्त होने के बाद होटल से सीधे विधायकों को बाड़ेबंदी में ले जाया जाएगा। कांग्रेस को गहलोत सरकार का समर्थन कर रहे 13 निर्दलीय विधायकों में टूट की आशंका है। मंगलवार को सीएम द्वारा बुलाई गई बैठक में चार विधायकों के नहीं पहुंचने के बाद यह चिंता ज्यादा बढ़ गई है। इस बीच, कांग्रेस के विधायकों में भी राज्यसभा चुनाव में तीनों प्रत्याशी बाहरी होने पर नाराजगी है। कई विधायकों ने बुधवार को शिविर के दौरान सीएम के समक्ष इस बात पर नाराजगी जताई।
शिविर में इन मुद्दों पर मंथन चिंतन शिविर में किए गए बड़े फैसलों को धरातल पर उतारने, युवाओं को 50 फीसद सत्ता और संगठन में पद देने, एक परिवार में एक व्यक्ति को टिकट देने, लगातार पांच साल से ज्यादा एक पद पर नहीं रहने के प्रावधानों के साथ आगामी विधानसभा व लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन सुधारने पर मंथन हो रहा है। डोटासरा ने नेताओं से कहा कि नेताओं के सुझावों को सौ फीसदी लागू करना संभव नहीं होगा। अंतिम फैसला कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा। इसलिए यह नहीं माना जाए कि जो कह दिया वह लागू होगा। शिविर में भाजपा की तर्ज पर मंडल गठित करने पर चर्चा हुई। ब्लाक कांग्रेस कमेटी और बूथ इकाई के बीच नई यूनिट मंडल बनाई जाएगी। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता मोहन प्रकाश ने संगठन को मजबूत करने के साथ ही कार्यकर्ताओं को धरातल पर रहकर भाजपा का मुकाबला करने के लिए तैयार रहने की बात कही। कांग्रेस की चिंता बढ़ी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने राष्ट्रीय महासचिव मुकुल वासनिक, प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा के समर्थन से सुभाष चंद्रा के नामांकन दाखिल करने के बाद कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीन विधायकों ने चंद्रा को समर्थन देने की बात कही है। यह है वोटों का गणित 200 सदस्यीय विधानसभा में प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 41-41 वोट चाहिए । कांग्रेस के खुद के 109 वोट हैं। कांग्रेस को अब तक उम्मीद थी कि सरकार को समर्थन दे रहे 13 निर्दलीय विधायक राज्यसभा चुनाव में उसके साथ रहेंगे, लेकिन चार निर्दलय विधायकों के रूख से कांग्रेस की चिंता बढ़ी है। माकपा और भारतीय ट्राइबल पार्टी के दो-दो विधायक सरकार को समर्थन दे रहे हैं। लेकिन राज्यसभा चुनाव में आदिवासी को उम्मीदवार नहीं बनाने पर ट्राइबल पार्टी के विधायक कांग्रेस से नाराज हैं। तीनों उम्मीदवारों के लिए 123 विधायकों के वोट जरूरी हैं। बदले हालात में अगर तीन विधायकों के वोट भी इधर-उधर हो गए तो कांग्रेस के तीसरे उम्मीदवार की हार हो सकती है। कांग्रेस 126 विधायकों के समर्थन का दावा है। कांग्रेस के इस दावे के बावजूद सेंध का खतरा बना हुआ है।
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CM अशोक गहलोत ने राजस्थान इलेक्ट्रिक व्हीकल पाॅलिसी को दी मंजूरी…. 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान इलेक्ट्रिक व्हीकल पाॅलिसी (REVP) को मंजूरी दे दी है। साथ, ही ऐसे वाहनों की खरीद को प्रोत्साहन देने के लिए प्रस्तावित एकमुश्त अंशदान और एसजीएसटी पुनर्भरण के लिए 40 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट प्रावधान को स्वीकृति दी है। इस नीति के लागू होने से प्रदेश में डीजल-पेट्रोल के वाहनों द्वारा होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी। गहलोत सरकार ने घोषणा की है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर 20 हजार रुपये तक की छूट मिलेगी।  सीएम की घोषणा के अनुसार इन वाहनों के क्रेताओं को एसजीएसटी का पुनर्भरण किए जाने के साथ ही, ऐसे वाहनों की खरीद को प्रोत्साहित देने के लिए एकमुश्त अनुदान के रूप में बैटरी क्षमता अनुसार दुपहिया वाहनों को 5 से 10 हजार रुपये प्रति वाहन एवं तिपहिया वाहनों को 10 से 20 हजार रुपये प्रति वाहन दिया जाएगी। प्रदेश में ई-व्हीकल्स को मोटर व्हीकल टैक्स के दायरे से भी बाहर रखा गया है। सीएम गहलोत ने बजट में की थी घोषणा  उल्लेखनीय है कि सीएम अशोक गहलोत ने वर्ष 2019-20 के बजट में इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति लाने की घोषणा की थी। सीएम ने कहा था कि राज्य सरकार सभी प्रकार के ई-व्हीकल्स के संचालन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। नई नीति में ई-व्हीकल्स विक्रेताओं के सभी प्रकार के पुनर्भरण 7 दिनों में करने का प्रावधान किया गया है। तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहन की खरीद पर भी ग्राहकों को वाहन की बैट्री क्षमता के आधार पर सब्सिडी मिलेगी। यदि इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन की बैट्री की क्षमता 3 किलोवाट से लेकर 5 किलोवाट से अधिक होगी तो ग्राहक को 10 हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। क्या है इलेक्ट्रिक वाहन पॉलिसी उल्लेखनीय है कि गहलो सरकार की ओर से जारी इलेक्ट्रिक वाहन पॉलिसी के अनुसार ग्राहक योजना का लाभ उठा सकेंगे। इसमें अधिकतम 20 हजार तक की सब्सिडी मिलेगी। सब्सिडी इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी क्षमता के अनुसार तय की गई है। यदि ग्राहक दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, जिसकी बैटरी क्षमता दो किलोवाट से पांच किलोवाट होगी तो ग्राहक को पांच हजार से 10 हजार तक की सब्सिडी मिलेगी।
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हरियाणा के बिजली मंत्री रणदीप सिंह चौटाला ने कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला के आरोपों का दिया ये जवाब…

हरियाणा के बिजली मंत्री रणजीत चौटाला ने कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला द्वारा हरियाणा की बिजली को गुजरात भेजने के आरोप को झूठ का पुलिंदा बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोगों को बरगलाने का काम कर रही है। अपनी पार्टी की अंदरूनी कलह को छिपाने के लिए रणदीप सुरजेवाला ने मीडिया में हरियाणा सरकार के खिलाफ जो अनर्गल बयानबाजी की है, उसमें वह खुद ही फंस गए हैं। रणजीत चौटाला ने कहा कि सुरजेवाला की याद्दाश्त काफी कमजोर हो गई है, क्योंकि वर्ष 2013 में अदाणी की याचिका पर ‘सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन’ के आदेश के तहत ‘मुंद्रा-महेंद्रगढ़ हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट’ 500 केवी लाइन को डेडिकेटिड ट्रांसमिशन लाइन से ‘इंटर स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम’ में परिवर्तित कर दिया गया था। इसके बाद इसी आदेश को 14 मई 2014 को जब रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस सरकार के दौरान स्वयं कैबिनेट का हिस्सा थे तो उस वक्त कैबिनेट ने मंजूरी दे दी थी। चौटाला ने बताया कि कांग्रेस शासनकाल में ही ‘मुंद्रा-महेंद्रगढ़ हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट लाइन’ तत्पश्चात ‘इंटर स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम नेटवर्क’ का हिस्सा बन गई थी और इसके ऊपर सारा नियंत्रण ‘रीजनल ग्रिड स्टेबिलिटी’ के आधार पर ‘नेशनल लोड डिस्पेच सेंटर’ का हो गया था। ‘नेशनल लोड डिस्पेच सेंटर’ एक स्वतंत्र बाडी है, इस पर हरियाणा का न तो एडमिनिस्ट्रेटिव और न ही आपरेशनल कंट्रोल है। उन्होंने कहा कि ‘मुंद्रा-महेंद्रगढ़ हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट लाइन’ के फ्लो से हरियाणा का कोई लेना-देना नहीं है। बिजली मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र से उत्पादित व अपने स्तर पर उत्पादित बिजली का हरियाणा पूरा सदुपयोग कर रहा है। हरियाणा के हिस्से की बिजली को कहीं भी नहीं भेजा गया है। बता दें, रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया है कि हरियाणा में बिजली संकट जानबूकर पैदा किया गया है। उन्होंन कहा कि नौ अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच हरियाणा सरकार ने गुजरात के मुंद्रा में 2356.30 लाख यूनिट बिजली भेजी है। सुरजेवाला ने कहा कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि वहां पर विधानसभा चुनाव होने हैं। उन राज्यों में राजनीतिक लाभ के लिए हरियाणा सरकार ने अपने प्रदेश के लोगों को परेशान होने के लिए छोड़ दिया।
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आज असम के दीफू में रैली को संबोधित कर रहे पीएम मोदी, देंगे 7 नए अस्पतालों की सौगात

PM Modi Visit Assam: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के दीफू में रैली को संबोधित कर रहे हैं. इससे पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उनका स्वागत किया. पीएम मोदी असम को 7 नए अस्पतालों की सौगात देंगे.

पीएम मोदी ने लोगों का किया अभिवादन

रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘मुझे जब-जब आपके बीच आने का मौका मिला है, आपका भरपूर प्यार, आपका अपनापन देखकर ऐसा लगता है कि जैसे ईश्वर का आशीर्वाद मिल रहा है. इतनी बड़ी संख्या में आप लोग यहां आए हैं, वो भी अपनी परंपरागत वेशभूषा में आए हैं, इसके लिए मैं आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं.’

लचित बोरफुकान को किया याद

उन्होंने कहा कि ये सुखद संयोग है कि आज जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, तब हम इस धरती के महान सपूत लचित बोरफुकान की 400वीं जन्मजयंति भी मना रहे हैं. उनका जीवन राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रशक्ति की प्रेरणा है. कार्बी आंगलोंग से देश के इस महान नायक को मैं नमन करता हूं.

‘नौजवानों के उज्ज्वल भविष्य का है शिलान्यास’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन की सरकार जहां भी हो, वहां सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना से काम करते हैं. आज ये संकल्प कार्बी आंगलोंग की धरती पर फिर से सशक्त हुआ है. आज जो शिलान्यास के कार्यक्रम हुए हैं, ये सिर्फ किसी इमारत का शिलान्यास नहीं है, ये यहां नौजवानों के उज्ज्वल भविष्य का शिलान्यास है. उच्च शिक्षा के लिए अब यहीं पर उचित व्यवस्था होने से अब गरीब से गरीब व्यक्ति भी अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे पाएगा.

‘2014 के बाद नार्थ ईस्ट में मुश्किलें लगातार कम हो रही हैं’

पीएम मोदी ने कहा, ‘असम की स्थायी शांति और तेज विकास के लिए जो समझौता हुआ था. उसको जमीन पर उतारने का काम आज तेज गति से चल रहा है. हथियार छोड़कर जो साथी राष्ट्र निर्माण के लिए लौटे हैं, उसके पुनर्वास के लिए भी बेहतर काम किया जा रहा है. आप सभी ने बीते दशकों में एक लंबा समय बहुत मुश्किलों से गुजारा है. लेकिन 2014 के बाद नार्थ ईस्ट में मुश्किलें लगातार कम हो रही हैं, लोगों का विकास हो रहा है.

‘AFSPA को नॉर्थ ईस्ट के कई क्षेत्रों से हटाया’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज पूरा देश ये देख रहा है कि बीते सालों में हिंसा, अराजकता और अविश्वास की दशकों पुरानी समस्याओं का कैसे समाधान किया जा रहा है. पहले जब इस क्षेत्र की चर्चा होती थी, तो कभी बम और कभी गोली की आवाज सुनाई देती थी. लेकिन आज तालियां गूंज रही हैं. उन्होंने कहा, ‘नॉर्थ ईस्ट में सरकार और समाज के सामुहिक प्रयासों से जैसे-जैसे शांति लौट रही है, वैसे-वैसे पुराने नियमों में भी बदलाव किया जा रहा है. लेकिन बीते 8 सालों के दौरान स्थाई शांति और बेहतर कानून व्यवस्था लागू होने के कारण हमने AFSPA को नॉर्थ ईस्ट के कई क्षेत्रों से हटा दिया है.’
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PM मोदी ने शहबाज शरीफ को पाकिस्तान के 23वें प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाने पर दी बधाई….

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहबाज शरीफ को पाकिस्तान के 23वें प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाने पर बधाई दी है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत आतंकवाद मुक्त क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है, ताकि दोनों देश अपनी विकास चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें.

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पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने प्रदेश में कांग्रेस की हार के कारण की समीक्षा रिपोर्ट पर खड़े किए ये सवाल, बोले- वह किसी भी गुटबाजी में नहीं

Uttarakhand Congress पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने प्रदेश में कांग्रेस की हार के कारण की समीक्षा रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं। यह रिपोर्ट पार्टी के पर्यवेक्षक व राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडेय ने तैयार कर हाईकमान को सौंपी थी। इसमें पार्टी की हार के लिए गुटबाजी को दोषी ठहराया गया है। प्रीतम ने कहा वह किसी गुटबाजी में नहीं रहे हैं। यह साबित होता है तो वह विधायकी से इस्तीफा देने को तैयार हैं। प्रीतम के करीबी गिरीश पुनेड़ा ने छोड़ी कांग्रेस प्रीतम सिंह को नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाए जाने से उनके करीबी पार्टी नेता व समर्थक मायूस हुए हैं। पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव गिरीश पुनेड़ा ने कांग्रेस छोड़ने की घोषणा की है। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक समस्या से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बीते दिनों पार्टी में उनकी ओर से बनाए गए डिजिटल सदस्यों से माफी मांगी। पार्टी छोडऩे से पहले पुनेड़ा ने इंटरनेट मीडिया पर अपनी पोस्ट में प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर भी निशाना साधा।