राष्ट्रीय

जाने दिल्ली से जयपुर लौटने के बाद क्या बोले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दिल्ली से जयपुर लौट आए है। सीएम गहलोत आज बीकानेर दौरे पर है। बीकानेर में मीडिया से बात करते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से बीजेपी हिल गई है। कर्नाटक में दो लाख लोग एकत्रित हुए। राहुल गांधी की यात्रा से लोग खुश है। सीएम ने कहा कि राजीव गांधी ग्राणीण ओलंपिक से खुशनुमा माहौल बना है। अब जल्द ही शहरी ओलंपिक की शुरुआत होगी। सीएम गहलोत ने कहा कि बीजेपी हाॅर्स ट्रेडिंग का प्रयास करती है। सरकार अभी भी मजबूत है। 5 साल पूरा करेंगे। पीएम मोदी मेरी छवि के बारे में जानते हैं। वो मुझसे ज्यादा हंबल दिखाना चाहते हैं। पीएम मोदी 3 बार दंडवत कर क्या साबित करना चाहते हैं। मेरी शांति और सद्भावन पर देश को अपील की सलाह नहीं मान रहे हैं। गहलोत का बयान काफी अहम  राजस्थान में सियासी संकट के बीच सीएम अशोक गहलोत का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। सीए गहलोत दिल्ली से आज ही राजस्थान लौटे है। सीएम गहलोत कह चुके हैं कि मुख्यमंत्री रहने या नहीं रहने का फैसला पार्टी आलाकमान करेगी। मेरे पद को मायने नहीं रखता है। बीकानेर में गहलोत का यह कहना कि सरकार पांच साल पूरा करेगी। हालांकि, गहलोत ने यह नहीं कहा कि पूरे 5 साल खुद सीएम रहेंगे या कोई और। सीएम गहलोत के बयान से साफ जाहिर है कि यदि गहलोत की कुर्सी चली भी जाती है तो बगावत नहीं होगी। गहलोत कैंप नए मुख्यमंत्री को पूरा सहयोग देगा। गहलोत कैंप कर रहा है पायलट का विरोध  उल्लेखनीय है कि रविवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक का गहलोत कैंप के विधायकों ने बहिष्कार कर दिया था। जिसकी वजह से सीएम गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष की रेस से बाहर हो गए। संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव सीएम बने रहेंगे। गहलोत कैंप के विधायक सचिन पायलट को सीएम बनने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पायलट हमें मंजूर नहीं है। फिलहाल प्रदेश में सियासी संकट का समाधान नहीं हो पाया है।
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राजस्थान के इस ज़िले में भूकंप के झटके, मौके पर पहुचे प्रशासनिक अधिकारी

राजस्थान के सिरोही जिले में भूकंप के झटके महसूस हुए है। शुक्रवार रात 11 बजकर 58 मिनट पर झटके महसूस किए गए। सिरोह जिले के पिंडवाड़ा में भूकंप के झटके आए। भूकंप के झटकों से लोग घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, किसी के हताहत होने की खबर नहीं हैं। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए है। किसी प्रकार के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि सिरोही में पहले भी कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए है। 2021 में भी आया था भूकंप उल्लेखनीय है कि 2021 को भी सिरोही जिले के पिंडवाडा में भूकंप के झटके आए थे। हालांकि, कोई हताहत नहीं हुआ था। इस बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। दो साल पहले सिरोही व पिंडवाड़ा में रविवार रात 8.53 बजे तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। इस दौरान भूकंप की तेज आवाज व कंपन होने से लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल गए। थोड़ी देर बाद में मकानों में पहुंचे लोगो ने दीवारों में भूकंप से आई दरारों को देखा। पिंडवाड़ा के सदर बाजार, भूत बंगला, राजपूतवास, रेबारी वास सहित अन्य क्षेत्र के मकानों में भूकंप दरारें आई थी। जानमाल का नुकसान नहीं अधिकारियों के माने तो शुक्रवार देर रात हुए भूकंप के झटके से जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। पिंडवाड़ा में भूकंप के झटके महसूस किए गए। अधिकारी पिंडवाड़ा पहुंच गए है। किसी प्रकार का नुकसान नहीं है। आपकों बता दें सिरोही भूकंप के हिसाब से काफी संवेदनशील जिला माना जाता है। भूकंप के कई बार झटके महसूस किए जा चुके हैं।  
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महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री छगन भुजबल और दो अन्य लोगों के खिलाफ मुंबई पुलिस ने दर्ज की FIR, पढ़े पूरी ख़बर

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री छगन भुजबल और दो अन्य लोगों के खिलाफ मुंबई पुलिस ने बिजनेसमैन को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में FIR दर्ज की है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शख्स ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता भुजबल को कुछ वीडियो भेजे थे, जिनमें वह कथित तौर पर हिंदू धर्म के खिलाफ बोलते नजर आ रहे थे। अधिकारी के मुताबिक, शुक्रवार रात इस मामले में चेंबूर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। उन्होंने बताया, ‘व्यक्ति की शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा-506(2) (आपराधिक धमकी) और धारा-34 (समान मंशा) के तहत भुजबल और दो अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया।’ भुजबल ने हिंदू धर्म के खिलाफ दिया बयान? अधिकारी के अनुसार, ‘प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि भुजबल ने शिकायतकर्ता की ओर से उन्हें दो वीडियो भेजने के बाद उसे जान से मारने की धमकी दी। इन वीडियो में भुजबल कथित तौर पर हिंदू धर्म के खिलाफ बोलते सुनाई दे रहे हैं।’ महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं भुजबल उन्होंने बताया कि मामले की जांच मुंबई अपराध शाखा की यूनिट-6 कर रही है। मालूम हो कि भुजबल एनसीपी के सदस्य हैं और मौजूदा समय में महाराष्ट्र विधानसभा में नासिक के येवला निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह राज्य के उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।  
राष्ट्रीय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में आज लॉन्च की 5G इंटरनेट सेवाएं, आगे पढ़े

भारतीय इंटरनेट यूजर्स के लिए 5G का इंतजार खत्म करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 5G इंटरनेट सेवाएं लॉन्च कर दी हैं। उन्होंने दिल्ली के प्रगति मैदान में आज 1 अक्टूबर से शुरू हुए इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2022 आयोजन के पहले दिन इन सेवाओं की शुरुआत की। इसके बाद सबसे पहले इंडस्ट्रीज और फिर बाकी यूजर्स के लिए ये 5G सेवाएं रोलआउट की जाएंगी। लगभग सभी टेलिकॉम कंपनियों ने 5G रोलआउट के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। आयोजन में शोकेस किए गए 5G सेवाओं के इस्तेमाल, सॉल्यूशंस और उनसे जुड़ी संभावनाओं के प्रदर्शन में भी प्रधानमंत्री ने हिस्सा लिया और इनके काम करने का तरीका समझा। IMC 2022 आयोजन में 100 से ज्यादा स्टार्ट-अप्स ने भी हिस्सा लिया है, जो 5G से जुड़े सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर सॉल्यूशंस पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इंटरनेट की 5वीं जेनरेशन के साथ आने वाले बदलावों को समझने के लिए पूरा वक्त लिया और समझा कि अलग-अलग क्षेत्रों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। पहले फेज में इन शहरों में मिलेंगी सेवाएं दूरसंचार विभाग ने बताया है कि 5G सेवाओं का फायदा सबसे पहले 13 शहरों में रहने वाले यूजर्स को मिलेगा। इन शहरों में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, चंडीगढ़, बेंगलुरु, गुरुग्राम, हैदराबाद, लखनऊ, पुणे, गांधीनगर, अहमदाबाद और जामनगर शामिल हैं। इन शहरों के बाद साल के आखिर तक बाकी बड़ी शहरों और अगले साल अन्य सर्कल्स में भी 5G सेवाओं से जुड़ा नेटवर्क तैयार किया जाएगा और इसका फायदा यूजर्स को मिलेगा। हालांकि, अभी केवल 8 शहरों में इनका फायदा मिल रहा है। 4G के मुकाबले 20 गुना तक ज्यादा स्पीड बीते दिनों सामने आया है कि भारत में 5G सेवाएं इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को 4G के मुकाबले 20 गुना तक तेज इंटरनेट स्पीड का फायदा मिल सकता है और वे 20Gbps तक स्पीड अनुभव कर सकेंगे। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय ग्राहक 5G सेवाओं में अपग्रेड के लिए 45 प्रतिशत तक प्रीमियम देने को तैयार हैं। बता दें, देश में 5G रेडी स्मार्टफोन्स वाले 10 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। 5G के जरिए तेज होगी विकास की रफ्तार संचार से जुड़ी नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और मशीन लर्निंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकेगा। नई टेक्नोलॉजी का फायदा सिर्फ इंटरनेट यूजर्स को ही नहीं मिलेगा बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, मैन्युफैक्चरिंग, उद्योग, आपदा प्रबंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों में भी इसे लागू किया जा सकेगा। कई हार्डवेयर सॉल्यूशंस इस टेक्नोलॉजी के रोलआउट के बाद सक्रिय रूप से इस्तेमाल किए जा सकेंगे। कंपनियों ने 5G का इस्तेमाल कर दिखाया रिलायंस जियो, वोडाफोन-आइडिया और भारती एयरटेल ने 5G सेवाओं के लॉन्च के बाद इनसे जुड़ी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। जियो ने ट्रू 5G की मदद से मुंबई के एक स्कूल टीचर को महाराष्ट्र, गुजरात और उड़ीसा की तीन अलग-अलग लोकेशंस से जोड़ा। जियो ने ऑगमेंटेड रिएलिटी (AR) और शिक्षा के क्षेत्र में बिना AR डिवाइस के इसके आसान इस्तेमाल को दिखाया। एयरटेल ने अपने डेमो में दिखाया कि उत्तर प्रदेश की एक लड़की ने कैसे होलोग्राम टेक्नोलॉजी की मदद से सौर मंडल के बारे में समझा और उसका अनुभव कैसा रहा। वोडाफोन-आइडिया ने दिल्ली मेट्रो भूमिगत टनल में काम कर रहे लोगों की सुरक्षा की क्षेत्र में नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का डेमो दिखाया। कंपनी ने दिखाया कि किस तरह VR और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की मदद से इन वर्कर्स को रियल-टाइम में मॉनीटर किया जा सकता है।  
उत्तराखंड प्रदेश

केदारनाथ धाम में हुआ हिमस्खलन, अलर्ट मोड पर जिला प्रशासन

केदारनाथ में कोई आपदा की आहट तो नहीं ?  केदारनाथ धाम में पिछले 10 दिनों में दो बार हिमस्खलन हुआ है। केदारनाथ धाम के पास चोराबारी ग्लेशियर पर आज शनिवार सुबह बर्फ के पहाड़ के भरभराकर गिरने से तीर्थ यात्रियों और स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल देखने को मिला। लेकिन, राहत की बात रही कि धाम और किसी भी तीर्थ यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है। भूस्खलन के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। पुलिस-प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही तीर्थ यात्रियों को एहतियात बरतने की भी सलाह दी जा रही है। आपको बता दें कि वर्ष 2013 में केदार वैली में चोराबाड़ी झील के टूटने से मंदाकिनी नदी में बाढ़ आ गई थी। आपदा में हजारों श्रद्धालुओं की जान भी गई थी। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया कि केदारनाथ धाम के पास हिमस्खलन हुआ है, लेकिन राहत की बात है कि किसी जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। बताया कि केदारनाथ धाम पूरी तरह से सुरक्षित है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनएस रजवार ने बताया कि शनिवार सुबह पांच  बजे के करीब हिमस्खलन हुआ है, लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर सामान्य है। यह मंदिर परिसर से 5 किलोमीटर दूर की घटना है। मानसून की विदाई नहीं, पांच से बारिश होगी उत्तराखंड से अभी मानसून की विदाई नहीं हुई है। पांच से नौ अक्टूबर तक बारिश का अनुमान मौसम विभाग ने जारी किया है। उसके बाद ही उत्तराखंड से मानसून विदा होगा। मौसम विज्ञान निदेशक डा. बिक्रम सिंह ने बताया कि राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी यूपी, दिल्ली के कुछ हिस्सों से मानसून विदा हुआ है। उत्तराखंड में पांच अक्टूबर से बारिश का अनुमान है। बारिश हल्की से मध्यम हो सकती है। सभी जिलों को इसके लिए सूचना भेज दी गई है। कहा कि कई जगह उत्तराखंड से मानसून की विदाई की जानकारी दी गई, जो सही नहीं है। बारिश का एक दौर अभी और दिखाई दे रहा है, उसकी के बाद मानसून की विदाई मानी जाएगी।  
उत्तराखंड प्रदेश

उत्तराखंड को राष्ट्रपति से मिला यह पुरस्कार, पढ़े पूरी ख़बर

नई दिल्ली में आयोजित 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में उत्तराखंड को मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का पुरस्कार मिला। उत्तराखंड की ओर से सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से यह पुरस्कार प्राप्त किया। यह पुरस्कार मिलने पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा यह गौरवान्वित करने वाला है। उत्तराखंड के लिए गौरव की बात समारोह के बाद सूचना महानिदेशक तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड का चयन इस पुरस्कार के लिए गौरव की बात है। उत्तराखंड ने बेहद कम समय में अन्य राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यह पुरस्कार प्राप्त किया है। यह पुरस्कार मिलने से उत्तराखंड में फिल्मों की शूटिंग को और ज्यादा प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने बताया कि फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई अहम फैसले लिए। इन्हीं फैसलों के चलते राज्य में फिल्म निर्माता निर्देशकों के लिए अनुकूल माहौल बन पाया। इन्हीं प्रयासों के फलस्वरूप आज उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राज्य में शूटिंग के लिए नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क तिवारी ने बताया कि सीएम के निर्देश पर प्रदेश की फिल्म नीति और अधिक आकर्षक बनाई जा रही है। शूटिंग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के तहत मंजूरी दी जा रही है। राज्य में शूटिंग के लिए कोई शुल्क भी नहीं लिया जा रहा है। नई फिल्म नीति में 1.5 करोड़ रुपये तक के अनुदान की व्यवस्था है। शूटिंग के दौरान पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। स्थानीय सिनेमाघरों में सप्ताह में एक शो क्षेत्रीय फिल्मों का अनिवार्य रूप से दिखाया जाना है ताकि राज्य में अधिकाधिक फिल्म निर्माता आएं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके बढ़ेंगे। धामी ने जताई खुशी राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, यह पुरस्कार देवभूमिवासियों के लिए गौरवान्वित करने वाला है। सभी को हार्दिक बधाई। राज्य सरकार फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए हरसम्भव प्रयास कर रही है। फिल्म शूटिंग संबंधी अनुमति प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। फिल्म नीति को और बेहतर बनाया जाएगा।
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जाने दिल्ली सरकार को पुरानी शराब नीति से कितना हुआ फैयदा

बीते एक महीने में पुरानी शराब नीति लागू होने के बाद सरकार को 768 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। पुरानी नीति के तहत दिल्ली में अभी तक करीब 460 दुकानें खुली हैं, जबकि इस माह में 500 दुकानें खोली जानी थी। इस दौरान कुल 291 लाख शराब की बोतलों की बिक्री हुई है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने जुलाई में शराब की नई नीति में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। जिसके बाद दिल्ली सरकार ने आबकारी नीति 2021-22 को वापस ले लिया था। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘एक सितंबर से लागू मौजूदा नीति के तहत 768 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है, जिसमें 460 करोड़ रुपये उत्पाद शुल्क और 140 करोड़ रुपये वैट के शामिल है। मौजूदा नीति के तहत, दिल्ली सरकार के चार निगमों- डीटीटीडीसी, डीएसआईआईडीसी, डीएससीएससी, डीसीसीडब्ल्यूएस ने शहर भर में खुदरा दुकानें खोली हैं। आबकारी विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, यह राजस्व अलग-अलग मद में मिला है। एक्साइज ड्यूटी के रूप में सरकार को 460 करोड़ का राजस्व मिला है। शराब पर लगने वाले वैट से 140 करोड़ मिले हैं। इसके अलावा देशी शराब की बिक्री से 30 करोड़, एल1 लाइसेंस (शराब होलसेल) से 44 करोड़, एल6 (शराब की दुकान) लाइसेंसधारियों से 26 करोड़ और होटल, क्लब और बार के लाइसेंस व शराब बिक्री से कुल 85 करोड़ का राजस्व मिला है। यह भी जानें – एक सितंबर को लागू हुई थी पुरानी शराब नीति। – राजधानी में 460 के करीब शराब की दुकानें खुली है। – 768 करोड़ का राजस्व मिला एक माह में आबकारी विभाग को – इस दौरान 291 लाख बोतल की बिक्री हुई राजधानी में। – 460 करोड़ एक्साइज ड्यूटी से मिला। – 140 करोड़ वैट के जरिए मिला राजस्व।
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केरल के इन 5 नेताओं को गृह मंत्रालय इन कारणों के करण पदान करेगी Y श्रेणी सुरक्षा

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला है कि प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की हिट लिस्ट में केरल के पांच आरएसएस नेता हैं। संभावित खतरे को भांपते हुए गृह मंत्रालय ने शनिवार को इन नेताओं को “वाई” श्रेणी की सुरक्षा प्रदान देने की घोषणा की। सूत्रों के अनुसार, एनआईए को छापेमारी के दौरान केरल पीएफआई सदस्य मोहम्मद बशीर के घर से एक सूची मिली, जिसमें कथित तौर पर पीएफआई के रडार पर आरएसएस के पांच नेताओं के नाम थे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को जानकारी मिली है कि प्रतिबंध लगाने के बाद केरल के पांच आरएसएस नेता पीएफआई की हिट लिस्ट में हैं। एनआईए ने मामले की जानकारी गृह मंत्रालय को साझा की, जिसके बाद सरकार ने यह फैसला लिया। गृह मंत्रालय ने एनआईए और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की रिपोर्ट के आधार पर केरल में आरएसएस के पांच नेताओं को “वाई” श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला किया है। आरएसएस नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अर्धसैनिक बलों के कमांडो तैनात किए जाएंगे। गौरतलब है कि एनआईए को छापेमारी के दौरान केरल पीएफआई सदस्य मोहम्मद बशीर के घर से एक सूची मिली, जिसमें कथित तौर पर पीएफआई के रडार पर आरएसएस के पांच नेताओं के नाम थे। ऐसे दी जाएगी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, आरएसएस नेताओं को सुरक्षा देने वाले कुल 11 कर्मी (पांच और व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए छह) शिफ्ट में काम करेंगे। इन नेताओं को सुरक्षा देने का फैसला खुफिया रिपोर्टों के आधार पर लिया गया है। बताते चलें कि केंद्र सरकार ने बीते बुधवार को पीएफआई और उसके सहयोगियों पर सुरक्षा और आतंकी संबंधों के खतरे का हवाला देते हुए पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कुल नौ संगठनों को “गैरकानूनी” घोषित किया गया है।
राष्ट्रीय

इन राज्यों में अगले तीन दिनों तक बारिश के आसार

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में आज भारी वर्षा की संभावना है। एक चक्रवाती परिसंचरण उत्तर-पूर्व और उससे सटे पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में उभरने की संभावना है। इसके कारण 2 अक्टूबर से पूर्वी भारत में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। मौसम की भविष्यवाणी करने वाली एजेंसी ने कहा कि एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र आंध्र प्रदेश के तट पर पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना हुआ है। एक चक्रवाती परिसंचरण आंध्र प्रदेश के तट पर पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना हुआ है। साथ ही एक पूर्व-पश्चिम ट्रफ चक्रवाती परिसंचरण से आंध्र प्रदेश तट पर पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी से तटीय कर्नाटक तक जाती है। वहीं, एक पूर्व-पश्चिम ट्रफ रेखा चक्रवाती परिसंचरण से आंध्र प्रदेश तट से दूर पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर तटीय कर्नाटक तक जाती है। इन प्रणालियों के प्रभाव में तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में शनिवार को भारी बारिश होने की संभावना है। आईएमडी ने पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 4 अक्टूबर को भारी बारिश होने का पूर्वानुमान लगाया है। आईएमडी की चेतावनी के मुताबिक, ओडिशा में 4 अक्टूबर तक कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। वहीं 3 और 4 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भी भारी वर्षा की संभावना है। झारखंड और पश्चिम बंगाल में अगले दो-तीन दिनों के दौरान हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। आईएमडी ने कहा है, ”एक से लेकर चार तारीख तक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा 2 से 4 अक्टूबर तक असम और मेघालय में भी बारिश हो सकती है। एक सी तीन अक्टूबर तक नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी बारिश के आसार हैं।” आईएमडी कहा है कि उत्तर पश्चिमी भारत के कुछ क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा, “अक्टूबर में भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है।”
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिल्ली दौरे के बाद देहरादून लौटे, 12 अक्तूबर को होगी कैबिनेट बैठक

दो दिन के दिल्ली दौरे के बाद देहरादून लौटे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार सुबह से ही सक्रिय दिखाई दिए। उन्होंने सुबह सेलाकुई में किसान मोर्चा के उत्तर क्षेत्रीय शिविर में शिरकत की। इसके बाद उन्होंने सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की और योजनाओं को लेकर अफसरों को सख्त निर्देश दिए। राज्य में बीते कई दिनों से मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें लगाई जा रही हैं। इन चर्चाओं को तब और हवा मिली जब मुख्यमंत्री धामी बिना किसी पूर्व कार्यक्रम के मंगलवार को अचानक दिल्ली रवाना हो गए। दिल्ली में पार्टी के कई शीर्ष नेताओं के साथ महाराष्ट्र के राज्यपाल और पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी से भी उन्होंने लंबी बैठक की। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के बीच ही कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत भी दिल्ली पहुंच गए थे। इससे राज्य का सियासी तापमान और बढ़ गया था। कयास लगाए जा रहे थे कि शीर्ष नेतृत्व जल्द ही उत्तराखंड को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकता है। हालांकि सीएम के गुरुवार को दून लौटने के बाद मामला कुछ शांत सा हो गया है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि राज्य कैबिनेट में फेरबदल तो होना है लेकिन इसमें अभी कुछ समय लग सकता है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह भी गुरुवार को देहरादून लौट आए और उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में शिरकत की। महाराज नहीं लौटे इधर, गुरुवार को सोशल मीडिया पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के नागपुर जाने की चर्चाएं चलती रहीं। हालांकि उनके पीआरओ ने बताया कि महाराज पूना गए हैं। वहां उन्हें एक निजी कार्यक्रम में शामिल होना है। सोशल मीडिया पर महाराज के इस दौरे की खासी चर्चा है और इसे आरएसएस मुख्यालय नागपुर से जोड़ा जा रहा है। कैबिनेट बैठक 12 को इस बीच धामी मंत्रिमंडल की बैठक का कार्यक्रम भी तय हो गया है। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, 12 अक्तूबर को कैबिनेट बैठक होगी। सुबह 11 बजे से सचिवालय के विश्वकर्मा भवन स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाल सभागार में सीएम पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट कई अहम मुद्दों पर निर्णय ले सकती है। अधिकारियों को विभागवार ठोस प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा, ‘मुख्यमंत्री के साथ ही पार्टी के अन्य नेताओं का दिल्ली दौरा सामान्य था। मंत्रिमंडल में बदलाव या फेरबदल से इसका कोई संबंध नहीं था। मुख्यमंत्री, केंद्रीय पर्यटन मंत्री से मिलने पहुंचे थे और मुझे लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करनी थी। अन्य मंत्री व विधायक भी अपने कार्यक्रमों के चलते दिल्ली में थे। इस दौरे के अनावश्यक राजनीतिक निहितार्थ नहीं निकाले जाने चाहिए।’